वाराणसी। केले की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब किसानों को दूसरे राज्य से टीशू कल्चर (केले के पौधे) मंगाने की जरूरत नहीं पडे़गी। इसकी व्यवस्था अब जिला उद्यान में ही की जाएगी। यहां किसानों को अनुदान के साथ पहली बार टीशू कल्चर भी दिया जाएगा।
अभी तक जिले में करीब 12 से 13 हेक्टेयर में करीब 50 किसान केले की खेती करते हैं। इसके लिए किसानों को बाहर से टीशू कल्चर (केले के पौधे) खरीदकर लगाना पड़ता था। पौधे महाराष्ट्र सहित अन्य कई राज्यों से मंगाए जाते थे। लेकिन इस वर्ष उद्यान विभाग दो हेक्टेयर लक्ष्य के लिए किसानों को अनुदान के साथ टीशू कल्चर की मुहैया कराएगा।
जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कमार ने बताया कि जिले में इस सीजन में 120 हेक्टेयर में शाक भाजी की शंकर प्रजाति के सब्जियों के उत्पादन को बढ़ाना है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 30 हेक्टेयर अधिक है। साथ ही तीन-तीन हेक्टेयर में पपीता और आम दो-दो हेक्टेयर में करौंदा और केले लगाने का अनंतिम (टेंटेटिव) लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहली बार विभाग की ओर से किसानों को केले की खेती के लिए जी-9 प्रजाति का टीशू कल्चर भी दिया जाएगा। इसके अलावा शंकर प्रजाति की सब्जियों की खेती के लिए किसानों को उन्नत किस्म के बीज भी अनुदान पर वितरित किया। इसका लाभ लेने के लिए जिले का कोई भी किसान विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है या कचहरी स्थित कंपनी बाग स्थित कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं।