वाराणसी। ईश्वर गंगी स्थित सिद्धपीठ लोटा टीला मठ की संपत्ति को लेकर रविवार की दोपहर हंगामा हो गया। मठ पर अपना अधिकार जता रहे वैष्णव विरक्त संप्रदाय के संतों को पुलिस ने मठ के भीतर जाने से रोक दिया। मठ में रहने वाली दो युवतियों ने संपत्ति पर अपना दावा करते हुए पुलिस से शिकायत की थी कि विरक्त संप्रदाय के संत मठ पर कब्जा करना चाहते हैं।
एहतियात के तौर पर मठ के बाहर पहले से तैनात पुलिस ने संतोें को मठ में जाने से रोक दिया। संतों को पुलिस जैतपुरा थाने ले गई। वहां सिटी मजिस्ट्रेट ने यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया। संतों का कहना था कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
लोटाटीला मठ के महंत रामकिशोर दास का चार दिन पूर्व महाप्रयाण होने के बाद वहां की महंतई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मठ में रहने वाली इंद्रावती, चंद्रावती नाम की युवतियों ने मठ पर अपना दावा जताया दिया है। उनका दावा है कि उनके नाम संत ने एक वसीयत भी लिखी है।
उस आधार पर उनका कहना है कि मठ पर उनका ही अधिकार है। इधर, वैष्णव विरक्त संत समाज की अगुवाई में संतों ने रविवार की दोपहर दो बजे मठ में घुसने की कोशिश की। नरहरपुरा स्थित पातालपुरी मठ से संत जुलूस की शक्ल में ईश्वर गंगी पहुंचे। वहां जाने पर पहले से तैनात पुलिस ने संतों को मठ में नहीं घुसने दिया।
यहां महंतई का फैसला करने के लिए आए संतों में महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, महंत बालक दास, महंत सर्वेश्वरण दास, महंत रामेश्वर दास, अवधबिहारी दास, महंत सिया वल्लभ शरण, ईश्वरदास, अवध किशोर दास, मोहन दास शामिल थे। बालक दास ने बताया कि लोटाटीला के महंत रहे राम किशोर दास को संत समाज ने बहिष्कृत कर दिया था। अगर प्रशासन न्याय नहीं दिलाएगा तो संत कोर्ट जाएंगे। यह संपत्ति संत समाज की है।