चार महीने की लंबी यात्रा के बाद सोमवार शाम बॉयलर वाराणसी के डाफी टोल प्लाजा पहुंचा। टोल के बगल से इसके लिए अस्थायी रास्ता बनाया गया है। बॉयलर को 308 पहियों वाले विशेष वाहन पर लादकर आगे ले जाया जा रहा है। इसके साथ करीब 100 सदस्यीय टीम चल रही है, जिसमें 20 इंजीनियर शामिल हैं। वाहन प्रतिदिन अधिकतम 40 और कम से कम 10 किलोमीटर की दूरी तय करता है। इसमें रोजाना करीब 200 से 300 लीटर डीजल खर्च होता है।
सुरक्षा और तकनीकी जरूरतों के लिए दो पिकअप, दो ट्रेलर, दो ट्रक, दो हाइड्रा, दो जेसीबी और चार छोटी गाड़ियां साथ चल रही हैं। बॉयलर के अक्तूबर तक लखीमपुर पहुंचने की संभावना है। इसके गुजरने के दौरान एक लेन पर यातायात रोक दिया गया। आगे ट्रैफिक पुलिस का स्कोर्ट चल रहा था। स्थानीय पुलिस और यातायात पुलिस की टीम भी तैनात रही। ट्रेलर के गुजरने के दौरान कुछ देर जाम लगा।
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार डाफी टोल प्लाजा और विश्वसुंदरी पुल बनने के बाद इतनी ऊंचाई वाली वस्तु पहली बार यहां से गुजर रही है। दो महीने पहले 174 टन वजनी और 7.3 मीटर ऊंचा बॉयलर यहां से गुजरा था। कर्मचारियों के लिए भोजन, पानी और दवा की व्यवस्था की गई है। ट्रेलर पर चारपाई और खाना बनाने की भी व्यवस्था है। मई से मशीन के साथ चल रहे कुछ कर्मचारी चार महीने से घर नहीं गए हैं।
अपर पुलिस उपायुक्त यातायात अंशुमान मिश्रा ने बताया कि 308 पहियों वाले वाहन को सुरक्षित पास कराने के लिए काशी, वरुणा और गोमती जोन के थानों तथा यातायात पुलिस को सतर्क किया गया है। मोहनसराय में इसकी ऊंचाई को देखते हुए हाइट गेट को हटाया गया।