वाराणसी। कोहरे के कारण फसलों में कीटों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि एक-दो दिन कोहरा फसलों के लिए फायदेमंद है, लेकिन 72 घंटे से अधिक रहा तो इसका दुष्प्रभाव फसलों पर पड़ेगा। इससे गेहूं को फायदा और दलहन, तिलहन फसल को नुकसान होगा।
कृषि शोध केंद्र के सहायक निदेशक आर के सिंह ने बताया कि 24 से 48 घंटों तक कोहरा और बदली का रबी की फसलों पर कोई असर नहीं बल्कि इसका फायदा ही होता है। लेकिन कोहरा लगातार 72 घंटों से अधिक रहा तो फसलों में माहों जैसे कीट के लगने की संभावना बढ़ जाएगी। किसान फसलों को पाले से बचाव के लिए खेत में नमी बरकरार रखें और खेत के चारों ओर धुआं करें। वहीं, माहों कीट से बचाव के लिए निगरानी करते रहें, जैसे ही इन कीटों का प्रकोप नजर आए कीटनाशक का छिड़काव करें।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने बताया की दिसंबर और जनवरी में कोहरा पड़ने की संभावना अधिक होती है, पाला पड़ने से फसल को काफी नुकसान होता है। जिस दिन ठंड अधिक हो, शाम को हवा का चलना रुक जाए, रात को आकाश साफ हो तो उस रात कोहरा पड़ने की संभावना अधिक होती है। कोहरे से आलू, टमाटर, बैंगन, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, अरहर, धनिया और आम समेत कई फसलें अधिक प्रभावित होती हैं।
कोहरे से बचाव के उपाय
- खेत के मेड़ पर घास-फूस जलाकर धुआं करें, इससे वातावरण ग़र्म हो जाएगा।
- सिंचाई कर खेत में नमी बरकरार रखें, संभव हो तो गनुगुने पानी का छिड़काव करें।
- यूरिया की 20 ग्राम मात्रा प्रति लीटर की दर से मिलाकर फसलों में छिड़काव करें।
- 25 ग्राम ग्लूकोज 15 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।