इस दौरान रेडिसन होटल ग्रुप (दक्षिण एशिया) के अध्यक्ष के. बी. काचरू और विन्धम होटल्स के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (ईएमईए) दिमित्रिस मानिकिस ने भी अपने विचार साझा किए। महाधिवेशन के संरक्षक व उदयपुर के डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुख्य विषय (थीम) पर विशेष प्रकाश डाला। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि काशी का स्वरूप अब बदल गया है।
पर्यटन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि काशी अब पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात हो रही है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद यहां काफी बदलाव आया है। यहां के युवा अब रोजगार की ओर अग्रसर हो रहे हैं। काशी का पर्यटन फॉर्मूला अब अन्य राज्य भी अपना रहे हैं।
महाधिवेशन में जुटीं विभूतियां और लोग।
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काशी की विभूतियों को ‘एफएचआरएआई भारत गौरव सम्मान’
उद्घाटन संध्या का मुख्य आकर्षण काशी की कला, साहित्य, संगीत और ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने वाली 13 विभूतियों को ‘एफएचआरएआई भारत गौरव सम्मान’ से सम्मानित करना रहा। इनमें प्रमुख रूप से भारत रत्न दिवंगत पंडित रवि शंकर एवं भारत रत्न दिवंगत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्म विभूषण दिवंगत पंडित किशन महाराज, पद्म विभूषण दिवंगत गिरिजा देवी एवं पद्म विभूषण डॉ. देवी प्रसाद द्विवेदी, उपन्यास सम्राट दिवंगत मुंशी प्रेमचंद एवं करपात्री रत्न डॉ. नागेंद्र पांडेय को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा पद्मश्री डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी, पद्मश्री डॉ. रजनीकांत, पद्मश्री राजेश्वर आचार्य, पद्मश्री चंद्रशेखर, पद्मश्री पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ और पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के बाद अतुल्य भारत संध्या के तहत पंडित रुद्र शंकर मिश्र द्वारा कथक नृत्य, देवब्रत मिश्र द्वारा सितार वादन और उस्ताद रिज़वान हैदर द्वारा शहनाई वादन की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। इसके बाद कार्यक्रम के पहले दिवस का समापन हुआ।