शहर में जाम का दबाव कम करने के लिए बनाए गए चारों फ्लाईओवर पर बिना झटके खाए नहीं चला जा सकता। इनका निर्माण भले ही सेतु निगम ने तय समय सीमा में कर लिया हो लेकिन गुणवत्तापूर्ण काम नहीं करा पाया। लापरवाही इतनी कि इन फ्लाईओवर की मरम्मत तक नहीं कराई गई। बीते मंगलवार को जब नवनिर्मित फुलवरिया फोरलेन पर मुख्यमंत्री ने झटके खाए तो उन्होंने अधिकारियों की जमकर क्लास ली और सभी फ्लाईओवर को झटका मुक्त कराने का निर्देश दिये।
शहर के बीच ककरमत्ता, पांडेयपुर और लहरतारा फ्लाईओवर हैं। ककरमत्ता फ्लाइओवर की लंबाई 783 मीटर है। 2014 में बने इस पुल की लागत 35 करोड़ रुपये थी। इस पुल से रोजाना 12 से 15 हजार वाहनों का आवागमन होता है। इस रास्ते आने जाने वालों को रोजाना 16 झटके खाने पड़ते हैं। ऐसे ही 1.12 किलोमीटर लंबे पांडेयपुर फ्लाईओवर का निर्माण 2011 में पूरा हुआ था। इस पर करीब 18.50 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस फ्लाईओवर से भी रोजाना करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं। इस पर 11 झटके वाले प्वाइंट्स हैं।
वहीं, शहर के सबसे लंबे फ्लाईओवर यानी चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की लंबाई 1800 मीटर है। 171 करोड़ रुपये की लागत से बने इस फ्लाईओवर का निर्माण 2020 में पूरा हुआ। इस रास्ते पर सर्वाधिक 29 झटके खाने को मिलेंगे। इन पूर्व निर्मित फ्लाईओवर के अलावा नवनिर्मित फुलवरिया फ्लाईओवर पर भी राहगीरों को 23 झटके मिलते हैं। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद सेतु निगम के अधिकारियों ने इसकी सुध ली। इस मार्ग की लेवलिंग अगले सप्ताह से कराई जाएगी। वहीं, अन्य तीनों फ्लाइओवर की मरम्मत लोक निर्माण विभाग कराएगा।