चार महीने सर्वे के बाद बाढ़ क्षेत्र का निर्धारण
जलशक्ति मंत्रालय के आदेश पर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआइएच) रुड़की (उत्तराखंड) के वैज्ञानिकों ने दूसरे चरण में कानपुर से बलिया तक करीब चार माह के सर्वे के बाद फ्लड जोन का निर्धारण किया है। इसके लिए आधुनिक उपकरणों का प्रयोग हुआ। कानपुर, फतेहपुर, प्रयागराज, मीरजापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली व गाजीपुर होते हुए बलिया तक गंगा का फ्लड जोन तय है। अध्ययन रिपोर्ट सिंचाई विभाग को सौंप दी गई है।
फ्लड जोन में 1508 पिलर व 279 लगेंगे बोर्ड
सिंचाई विभाग के वाराणसी परिक्षेत्र के चार जिलों में तय फ्लड जोन में कुल 1508 पिलर और 279 साइन बोर्ड लगेंगे। सुरेशचंद्र आजाद ने बताया कि 1.48 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां से वाराणसी के अलावा चंदौली, मिर्जापुर, भदोही जिले में पिलर और साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। सिंचाई विभाग के मिर्जापुर और आजमगढ़ परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मिर्जापुर के कुछ भाग, बलिया में पिलर और साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।