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Flood in Varanasi: चौथी बार बदला आरती स्थल, छत पर हुई आरती; जलस्तर पहुंचा 65.94 मीटर

Sat, 12 Jul 2025 05:33 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: गंगा में बढ़ोत्तरी के चलते वरुणा में भी हलचल दिखने लगी है। नदी में तेज रफ्तार से बढ़ाव ने अब तटवासियों को चिंतित कर दिया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के संकेत हैं क्योंकि पहाड़ों पर बरसात लगातार हो रही है। 
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बाढ़ के कारण छत पर गंगा आरती की गई। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Flood in Varanasi: गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी लगातार जारी है। शुक्रवार को जलस्तर बढ़ने के कारण चौथी बार दोनों गंगा आरती का स्थल बदलना पड़ा और छत पर मां गंगा की आरती आरंभ हो गई है। जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह में परेशानियां बढ़ गई हैं। वहीं दूसरी तरफ गंगा के जलस्तर के कारण वरुणा में भी हलचल तेज हो गई है।

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केंद्रीय जल आयोग की बाढ़ बुलेटिन के अनुसार गंगा का जलस्तर रात आठ बजे 65.94 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी हो रही है। सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 64.70 मीटर था। 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में 66 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी हुई है।

दशाश्वमेध घाट पर होने वाली नित्य गंगा की आरती अब गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर और गंगोत्री सेवा समिति की छत पर गंगा आरती शुरू हो गई। हरिश्चंद्र घाट पर जलस्तर बाबा मसाननाथ मंदिर को जलमग्न कर चुका है। अब सिर्फ बाबा का विग्रह ही दिख रहा है।

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वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला
तटवर्ती इलाके में रहने वालों की बढ़ी धुकधुकी
जलस्तर बढ़ने से ब्रह्मा घाट, पंचगंगा घाट, गाय घाट, गोला घाट, सक्का घाट, प्रह्लाद घाट, राजघाट और नमो घाट की सीढ़ियां डूब गई हैं। सभी घाटों का आपसी सम्पर्क मार्ग भी टूट गया है। कई स्थानों पर सीढ़ियां जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे आमजन और श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। 

गंगा घाट पर जगह-जगह वाटर चेक पोस्ट बना कर एनडीआरएफ और जल पुलिस बाढ़ पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की चिंता बढ़ गई है। गंगा की सहायक नदी वरुणा में भी बढ़ाव शुरु हो गया है। नक्खी घाट, शैलपुत्री मंदिर, सीधवा घाट, उंचवा, पुलकोहना, तालीम नगर, हिदायत नगर समेत आसपास के घनी आबादी वाले इलाके में रहने वाले लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। 

इन क्षेत्रों में वरुणा का पानी सबसे पहले पहुंचता है और दो मंजिला इमारतें भी डूब जाती हैं। तटवर्ती इलाके में रहने वालों का कहना है कि यदि वरुणा नदी का पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो जल्द ही उन्हें अपना आशियाना छोड़कर दूसरे जगह पर शरण लेना होगा।

गोदाैलिया में लगा बारिश का पानी। - फोटो : अमर उजाला
गंगा में लगातार बढ़ते जलस्तर को किसानों की चिंता बढ़ी
गंगा में लगातार बढ़ते जल स्तर को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई हैं। रमना गांव के पूर्व तरफ गंगा के किनारे बना शवदाह स्थल पानी से घिर गया हैं। बढ़ते जल स्तर के बीच दो फीट पानी और बढ़ने पर रमना मलहिया टिकरी तारापुर गांव के किनारे लगी सब्जी की सफल पानी में डूब जाएगी। 

रमना के किसान राजबली पटेल दिलीप पटेल किशन पटेल, अमित पटेल, टिकरी के राजेश साहनी, विक्रम साहनी ने बताया कि दो फीट गंगा का जल स्तर बढ़ने पर गंगा किनारे लगाई गई सब्जी, मक्का, बाजरा, तिल और अरहर की सैकड़ों बीघा फसल पानी से खराब हो जाएगी। वर्ष 2013 में बाढ़ से हुई हानि के बाद तारापुर सराय ढंगरी टिकरी रमना मलहिया तक तीन मीटर चौड़ा पांच मीटर ऊंचा तटबंध बनना था, लेकिन तटबंध बनाने का काम अधूरा रह गया।
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कई स्थानों पर घुटने पर लगा पानी। - फोटो : अमर उजाला
बढ़ता जलस्तर बना आफत, अम्बा-मोकलपुर घाट पर आवागमन बाधित
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से चिरईगांव क्षेत्र के ढाब इलाके में स्थित एक तरफ गंगा और दूसरी तरफ सोता में बाढ़ का पानी भर गया है। इससे अम्बा-मोकलपुर घाट के रास्ते का संपर्क पूरी तरह से कट गया है और आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। इस स्थिति के चलते मोकलपुर, गोबरहां, रामपुर सहित आसपास के गांवों के लोगों को अब जाल्हुपुर, गौरा कला बाजार जाने के लिए रामचन्दीपुर -मुस्तफाबाद पुल से होकर आना-जाना पड़ेगा। 

इससे ग्रामीणों को 6 से 8 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे न केवल समय बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि की रफ्तार ऐसे ही बनी रही तो इसका असर केवल आवाजाही पर ही नहीं, बल्कि खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। गंगा सोता की तलहटी में बोई गई गर्मी की सब्जियों की फसलें पानी में डूबने लगेंगी। 

किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। चौबेपुर में गंगा का जल स्तर बढ़ने से गंगा के किनारे परनापुर, मुरीदपुर ,गौरा उपरवार, बर्थरा कलां, सरसौल सिरिस्ती समेत कई गांवों के किसानों की गंगा के तटवर्ती इलाकों में बोई गई साग सब्जी परवल, लौकी, नेनुआ की खेती चौपट हो गई है।

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