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Flood Alert: फ्लड जोन में श्री काशी विश्वनाथ धाम, चौबेपुर का टोल प्लाजा, मिर्जापुर डीएम कार्यालय; जानें खास

Fri, 22 May 2026 12:48 PM IST
Aman Vishwakarma हीरालाल चौरसिया, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: यूपी के वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, गाजीपुर, चंदौली होकर बलिया तक गंगा किनारे चिन्हांकन किया गया। बलिया के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के पास भी फ्लड जोन का पिलर लगा है। एनजीटी ने हरिद्वार से बलिया तक गंगा व सहायक नदियों के किनारे फ्लड जोन घोषित किया है। वाराणसी में गंगा किनारे 363 पिलर व 68 साइनेज बोर्ड लग रहे हैं।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरिद्वार से बलिया तक गंगा और उसकी सहायक नदियों के आसपास पहली बार फ्लड जोन घोषित किया गया है। फ्लड जोन में श्री काशी विश्वनाथ धाम, चौबेपुर का टोल प्लाजा और पड़ोसी जिले मिर्जापुर का जिलाधिकारी कार्यालय भी है। मां विंध्यवासिनी धाम से जुड़े क्षेत्र और बलिया में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का कुछ हिस्सा भी फ्लड जोन के दायरे में है। चंदौली, गाजीपुर और बलिया में पिलर लग गए हैं। 2262 पिलर लगाने पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। वाराणसी में गंगा किनारे 363 पिलर और 68 साइनेज बोर्ड लगने हैं।

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पहल पर हरिद्वार से बलिया तक सुव्यवस्थित फ्लड जोन (बाढ़ क्षेत्र) तय किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में सिंचाई विभाग को गंगा किनारे वाले जिलों के फ्लड जोन में पिलर और साइनेज बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी मिली है। गंगा के बाढ़ क्षेत्र में आने वाले 200-250 मीटर की दूरी पर कंक्रीट के पिलर, एक किलोमीटर में साइनेज बोर्ड लगाए जा रहे हैं।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र आजाद ने बताया कि वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, बलिया, मिर्जापुर और भदोही के तय फ्लड जोन में 2262 पिलर और 279 साइन बोर्ड लगने हैं। बलिया, गाजीपुर, चंदौली में फ्लड जोन तय करने का काम पूरा हो गया है। वाराणसी में 20 फीसदी काम ही बचा है। मिर्जापुर और भदोही में काम चल रहा है।

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घाटों किनारे पिलर लगाना बना चुनौती, आठ क्विंटल का है पिलर
वाराणसी में गंगा घाटों पर पिलर लगाना सिंचाई विभाग के लिए चुनौती बना है। कारण, इन इलाकों में पिलर ले जाना मुश्किल है क्योंकि एक पिलर आठ क्विंटल का है। इसे गलियों से घाटों तक ले जाना मुश्किल है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि घाट क्षेत्र में पिलर लगाने की व्यवस्था की जा रही है। नाव के जरिये निर्माण सामग्री ले जाई जाएगी। जहां पिलर लगने होंगे वहीं ढलाई की व्यवस्था की जाएगी।

बाढ़ से जान-माल के नुकसान होंगे कम
एनजीटी का तर्क है कि जिलास्तर पर फ्लड जोन तय होने से आपसी विवादों में कमी आएगी। एनजीटी के तय फ्लड जोन से बाढ़ से होने वाले जान-माल के नुकसान कम हो जाएगी। भूजल रिचार्ज, बाढ़ और भारी बारिश से पानी रिहायशी इलाकों में नहीं घुसेगा। नदी की प्राकृतिक एवं उसके किनारे की जैव विविधता को बचाने में मदद मिलेगी।

वरुणा-असि को भी फ्लड जोन में करने की तैयारी
गंगा की सहायक वरुणा और असि नदी का भी सर्वे चल रहा है। इसे भी फ्लड जोन में शामिल किया जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र आजाद ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर तय एजेंसी इन नदियों का सर्वे कर रही हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद शासन से पिलर व साइनेज बोर्ड लगाने के लिए बजट की मांग की जाएगी।

तस्वीर खींचने के बाद सटीक स्थान दिखता है
एनजीटी के तय मानक के तहत ही पिलर लगाए जा रहे हैं। नोटकेम एप के जरिये स्थान की तस्वीर खींचने के बाद अक्षांश-देशांतर (सटीक स्थान) दिखता है फिर पिलर व साइनेज बोर्ड लगाए जाते हैं।

जिला पिलर बजट (लाख में) काम (प्रतिशत में)
वाराणसी 363 34.61 80
मिर्जापुर 308 29.54 60
चंदौली 479 47.49 100
भदोही 358 35.37 60
गाजीपुर 330 25.80 100
बलिया 424 30.00 100
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फ्लड जोन जो भी स्थल आ रहे हैं, वहां पिलर लगाए जा रहे हैं। इनमें घाटों के किनारे के मंदिर, मठ और आवासीय इलाके शामिल हैं। गंगा किनारे के समतल या निचला भाग जो हमेशा बाढ़ में डूब जाता है उसे नदी का अनिवार्य हिस्सा मानकर एनजीटी संरक्षित करवा रही है। इस तय दायरे में निर्माण पर रोक रहेगी। निर्माण कराने पर कानूनी कार्रवाई होगी। - सुरेश चंद्र आजाद, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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