ऊर्जांचल को सौर ऊर्जा का भी हब बनाने की योजना है। रिहंद डैम पर पांच सौ और एनटीपीसी सिंगरौली के ऐशडैम पर सवा सौ मेगावाट का सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित करने के बाद अब यहां केरल के कायाकुलम की तर्ज पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बैठाने की तैयारी है।
पिछले दिनों एनटीपीसी के एक दल ने कायाकुलम का दौरा कर प्लांटों का जायजा भी लिया। केंद्र सरकार ने 2022 तक सौर ऊर्जा से एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें से दस हजार मेगावाट बिजली एनटीपीसी को पैदा करनी है।
इसको देखते हुए एनटीपीसी की तरफ से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। एनटीपीसी अपने परियोजनाओं के परिसर और आवासीय छतों पर सोलर पैनल के जरिए मौजूदा समय में एक हजार मेगावाट बिजली पैदा कर रही है। शेष नौ हजार मेगावाट बिजली के लिए पावर प्लांट बिछाया जाना है।
बताते हैं कि इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब एनटीपीसी ने अपनी मदर यूनिट सिंगरौली, यूपी के सबसे बड़े पावर प्लांट रिहंद और देश के सबसे बड़े बिजली घर विंध्याचल परिसर और इसके इर्द-गिर्द स्थित जलाशयों, नालों में इस तरह से बिजली उत्पादन की योजना को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है।
सूत्रों की मानें तो इसके लिए एनटीपीसी की सभी परियोजनाओं से एक से दो व्यक्तियों के एक दल को पखवारे भर पूर्व कायाकुलम भेजा भी गया। इस टीम ने वहां उत्पादित हो रही बिजली और उसके तरीके की जानकारी हासिल की। अब कौन सी परियोजना, फ्लोटिंग सोलर प्लांट के जरिए कितनी बिजली पैदा करेगी, इस पर विचार शुरू हो गया है।
सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही एनटीपीसी की ऊर्जांचल स्थित तीनों परियोजनाओं में इस पर काम शुरू हो सकता है। उधर, एनटीपीसी सिंगरौली के पीआरओ आदेश पांडेय ने भी सौर ऊर्जा को लेकर तेजी से पहल जारी होने की बात स्वीकार की।
कहा कि कायाकुलम में हुआ प्रयोग काफी सफल रहा है। इसको देखते हुए उनके यहां भी इसको लेकर जल्द पहल होने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल कंपनी मुख्यालय से इस बारे में जैसा दिशा-निर्देश मिलेगा, उस अनुरूप कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।