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काशी में महाकुंभ जैसा नजारा, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए उमड़ा आस्था का जन सैलाब

Sat, 04 Nov 2017 03:28 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान के लिए उमड़ा जन सैलाब - फोटो : अमर उजाला
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काशी में कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए शनिवार को गंगा तटों पर आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। चौरासी घाटों पर स्नान का उत्सव किसी कुंभ से कम नहीं था। कहीं समूहबद्ध महिलाओं के गंगा गीत गूंज रहे थे तो कहीं दीपदान और पूजा, अर्घ्यदान।
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गंगा पार स्नान के बाद रेत से विष्णु और शिव की प्रतिमाएं बनाकर महिलाओं ने आरती उतारी और घर, परिवार से समाज के मंगल की कामना की। तीर्थनगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर पांच लाख से अधिक लोगों के डुबकी लगाने का अनुमान है।

शुक्रवार की मध्यरात्रि के बाद से ही दशाश्वमेध जाने वाली सड़कों पर स्नानार्थियों का रेला उमड़ने लगा। भोर तक दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट पैक हो गए। कहीं खड़ा होने की भी जगह नहीं बची।
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पुण्य की डुबकी लगाने वालों का रेला इस कदर उमड़ा कि घाटों पर जहां तक नजर जाए, वहां तक सिर्फ स्नानार्थियों के ही सिर नजर आने लगे। हालत यह हुई कि घाट पर जगह न होने की वजह से प्रशासन को स्नानार्थियों के जत्थों को सड़कों पर ही जहां-तहां रोकना पड़ा।

लाउड स्पीकर से सूचना प्रसारित कर घाट खाली कराए जा रहे थे, ताकि इंतजार में खड़ी भीड़ को स्नान के लिए घाटों पर जाने के लिए छोड़ा जा सके। इस रेला में सैकड़ों बच्चे-महिलाएं अपनों से बिछड़ गए। गंगा के दोनों किनारों पर मेले जैसा मंजर था। अस्सी घाट, राजघाट पर बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। 
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चेंजिंग रूम नदारद, साड़ियों के परदे बनाकर महिलाओं ने बदले कपड़े  

कार्तिक पूर्णिमा पर पांच लाख से अ‌ध‌िक लोगों ने आस्था की डूबकी लगाई - फोटो : अमर उजाला
कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर्व पर नगर निगम प्रशासन की उदासीनता से श्रद्धालुओं को जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ा। स्नान घाटों पर लाखों का रेला उमड़ने के बावजूद अस्थाई चेजिंग रूम तक नहीं बनाए गए। इससे महिला स्नानार्थियों को कपड़े बदलने में खासा दिक्कतें हुईं।

साड़ियों के परदे लगाकर महिलाएं कपड़े बदलने के लिए विवश हुईं। इस दौरान लोग प्रशासन को कोसते रहे। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए भीड़ का दबाव बढ़ने पर प्रशासन को आनन-फानन में दशाश्वमेध घाट जाने वाले स्नानार्थियों को रोकना पड़ा।

इस घाट पर हजारों की तादाद में लोग स्नान नहीं कर सके। उन्हें दूसरे घाटों के लिए डायवर्ट कर दिया गया। इससे बड़ी तादाद में लोग अस्सी घाट, हनुमान घाट, केदार घाट, पांडेय घाट, राजा घाट पर डुबकी लगाने पहुंचे। पुण्य की डुबकी लगाने वालों ने गरीबों को अन्न-वस्त्र का खूब दान किया।

दशाश्वमेध, शीतला घाट, अस्सी घाट की सीढ़ियों पर हजारों की तादाद में बेसहारा परिवार के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग कतारबद्ध होकर स्नानार्थियों का ध्यान खींच रहे थे। कुछ लोगों ने भोजन के पैकेट वितरित किए। भोजन, नाश्ता और वस्त्र लेने के लिए गरीबों में जमकर धक्कामुक्की हुई।  

कार्तिक पूर्णिमा पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भोर से ही लंबी कतार लग गई। हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में जलाभिषेक किया।इस दौरान छत्ताद्वार के अलावा सरस्वती फाटक और कोतवालपुरा मार्गों पर लंबी कतारें सुबह से शाम तक लगी रहीं।  
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