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रामनगर गंगा हादसा: 'घबराइए मत अब्बू, बड़ा होकर मैं सब ठीक कर दूंगा', बच्चों की बातें यादकर बदहवाश हो जाते हैं परिजन

Sun, 31 May 2020 12:31 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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गंगा में डूबे बच्चों को बाहर निकालकर लाते लोग। - फोटो : अमर उजाला।
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वाराणसी के रामनगर में गंगा में डूबने से पांच बच्चों की मौत से हर कोई स्तब्ध है। रामनगर थाना के वारीगढ़ही मोहल्ले के तौसीफ, फरदीन, मोहम्मद सैफ, रिजवान और वाजिदपुर सीवान का मोहम्मद रेहान खान उर्फ लकी अपने दो अन्य दोस्तों के साथ शुक्रवार को सिपहिया घाट पर गए थे और डूबने से मौत हो गई।

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घबराइए मत अब्बू... बड़ा होकर मैं सब ठीक कर दूंगा
मासूम फरदीन अपने अब्बू की आर्थिक स्थिति खराब देख उन्हें हमेशा संभाल देता था। उसकी बातों को यादकर उसके अब्बू मुमताज और अम्मी परवीन बिलख रही थीं। मुमताज ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। बड़ी मुश्किल से परिवार की गुजर-बसर हो पाती है। फरदीन हमेशा हिम्मत बढ़ाता था। कहता था कि अब्बू घबराइये नहीं, बड़ा होकर मैं सब ठीक कर दूंगा। वो कहता था कि अपनी तीनों बहनों का निकाह धूमधाम से कराऊंगा। ना जाने किसकी नजर लग गई और फरदीन अपनी बातों को याद करने के लिए हमें छोड़कर हमसे बहुत दूर चला गया।


फरदीन की तीनों बहनें बेसुध दिखीं। मुमताज काशी राजपरिवार की कृष्णा प्रिया के यहां काम करते हैं। कृष्णा प्रिया ने मुमताज के घर अपना स्टाफ भेजकर दुख जताया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

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लकी के लिए ही तो दुबई आए थे अब्बा, अब यहां क्या करें :
वाजिदपुर निवासी लकी के पिता मोहम्मद नियाज दुबई में काम करते हैं। शुक्रवार को नियाज के पिता मोहम्मन रेयान खान अपने बेटे से पोते की मौत की बात छिपाते रहे। हालांकि बहुत देर तक रेयाज संयम नहीं रख पाए और बिलखते हुए बेटे से मासूम पोते की मौत की बात फोन पर साझा कर दी। नियाज काफी देर तक चुप रहे।

इसके बाद उन्होंने कहा कि अब्बा हम तो लकी की बेहतरी के लिए ही दुबई आए थे। अब भला यहां रुककर क्या करेंगे? उधर, लकी की मां रजिया बेगम घर के एक से दूसरे कमरे और फिर बाहर जाकर लकी को आवाज दे रही थीं। तौसीफ, रिजवान और सैफ के मां-बाप और भाई-बहनों की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। किसी को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या से क्या हो गया और कैसे खुद को समझाएं।
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लॉकडाउन में टोटो चलाना छूटा तो व्यस्त रहता था मोबाइल में :
कक्षा आठ पास तौसीफ जीवकोपार्जन के लिए टोटो चलाता था। इसके साथ ही वह मोबाइल और सोशल मीडिया का अच्छा जानकार था। परिजनों ने बताया कि लॉकडाउन में टोटो चलाना छूटा तो तौसीफ दिन भर मोबाइल में ही व्यस्त रहता था। ईद पर भी वह कई पूरे दिन टिकटॉक वीडियो बनाता था। हालांकि तौसीफ के गंगा में डूबने के साथ ही उसका मोबाइल भी डूब गया।

पिता रफीक और परिजनों का कहना था कि तौसीफ घर आने पर अपनी वीडियो बनाने वाली शैली में ही बात करता था। न जाने क्या से क्या हो गया है। उधर, इलाके के किशोरों ने बताया कि वारीगढ़ही निवासी फरदीन और वाजिदपुर सीवान निवासी लकी दोस्त थे। शुक्रवार को तौसीफ के साथ फरदीन को भी गंगा घाट की ओर जाते देख कर लकी उन सबके साथ शामिल हो गया था।  
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