लकी के लिए ही तो दुबई आए थे अब्बा, अब यहां क्या करें :
वाजिदपुर निवासी लकी के पिता मोहम्मद नियाज दुबई में काम करते हैं। शुक्रवार को नियाज के पिता मोहम्मन रेयान खान अपने बेटे से पोते की मौत की बात छिपाते रहे। हालांकि बहुत देर तक रेयाज संयम नहीं रख पाए और बिलखते हुए बेटे से मासूम पोते की मौत की बात फोन पर साझा कर दी। नियाज काफी देर तक चुप रहे।
इसके बाद उन्होंने कहा कि अब्बा हम तो लकी की बेहतरी के लिए ही दुबई आए थे। अब भला यहां रुककर क्या करेंगे? उधर, लकी की मां रजिया बेगम घर के एक से दूसरे कमरे और फिर बाहर जाकर लकी को आवाज दे रही थीं। तौसीफ, रिजवान और सैफ के मां-बाप और भाई-बहनों की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। किसी को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या से क्या हो गया और कैसे खुद को समझाएं।
लॉकडाउन में टोटो चलाना छूटा तो व्यस्त रहता था मोबाइल में :
कक्षा आठ पास तौसीफ जीवकोपार्जन के लिए टोटो चलाता था। इसके साथ ही वह मोबाइल और सोशल मीडिया का अच्छा जानकार था। परिजनों ने बताया कि लॉकडाउन में टोटो चलाना छूटा तो तौसीफ दिन भर मोबाइल में ही व्यस्त रहता था। ईद पर भी वह कई पूरे दिन टिकटॉक वीडियो बनाता था। हालांकि तौसीफ के गंगा में डूबने के साथ ही उसका मोबाइल भी डूब गया।
पिता रफीक और परिजनों का कहना था कि तौसीफ घर आने पर अपनी वीडियो बनाने वाली शैली में ही बात करता था। न जाने क्या से क्या हो गया है। उधर, इलाके के किशोरों ने बताया कि वारीगढ़ही निवासी फरदीन और वाजिदपुर सीवान निवासी लकी दोस्त थे। शुक्रवार को तौसीफ के साथ फरदीन को भी गंगा घाट की ओर जाते देख कर लकी उन सबके साथ शामिल हो गया था।