पातालपुरी मठ नरहरपुरा में विशाल भारत संस्थान एवं पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद की ओर से श्रीराम परिवार गाथा के माध्यम से राम के प्रामाणिक इतिहास पर बृहस्पवितार को भी शोध पत्र पढ़े गए। बीएचयू की पांच छात्राओं को माता चित्रसेना देवी शोध पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार पाने वालों में बीएचयू की शोध छात्रा अंशिका यादव को प्रथम पुरस्कार के रूप में 3100 रुपये नकद दिया गया। बीएचयू की ही जीनत रहमान, सृष्टि त्यागी, प्रज्ञा परमिता महारी और रुखसार परवीन को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 2100 रुपये नकद पुरस्कार दिया गया।
मुख्य गाथाकार जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि श्रीराम धर्म न्याय और करुणा के आधार पर राज्य का संचालन करते थे। स्त्रियां सुरक्षित और सम्मानित थीं। लोक कल्याण शासन का सर्वोच्च उद्देश्य था। महंत अवधेश दास ने कहा कि प्रकृति और समाज में संतुलन था। रामराज्य में न्याय निष्पक्ष होता था। महंत प्रभु रामदास, अयोध्या के गौरीशंकर दास, बयाना के अवधेश दास, डॉ. कवींद्र नारायण श्रीवास्तव, जगदीश्वर दास, बलराम दास, वासुदेव दास, इंद्रकुमार दास, बाबा बृजभूषण, डॉ. मृदुला जायसवाल, डॉ. अर्चना भारतवंशी आदि ने विचार रखे।