सास बीमार पड़ीं तो शुरू कर दी छठ पूजा
श्यामा नगर ककरमत्ता की रहने वाली इंदुमती सिंह मौर्या पिछले 20 वर्षों से छठी मइया की पूजा करती हैं। बताती हैं कि मैं ससुराल आई थी और छठ पूजा का समय था, उसी समय मेरी सास की तबीयत खराब हो गई। मेरी सास ने मुझसे पूछा कि क्या तुम इस बार मेरी मदद कर छठ मइया का व्रत रख लोगी। मुझे छठ पूजा के बारे में कुछ पता नहीं था, लेकिन मैंने उनके नाराज हो जाने के डर से व्रत किया। उसके अगले साल मेरी सास ठीक हो गईं। इसके बाद हम दोनों व्रत रखने लगीं।
राजस्थान से छठ मनाने काशी आईं नेहा
राजस्थान के झुंझुनू से नेहा सिंघानिया काशी में डाला छठ का व्रत करने आई हैं। उनकी पहली छठ पूजा होगी। पिता संतोष ने बताया कि इसी साल झुंझुनू में शादी हुई है। मगर, वहां छठ पूजा न होने से यहां पर करने के लिए बेटी को बुलाए हैं।
घरों में गूंज रहे छठ गीत
घरों में छठ गीत गूंजने लगे हैं। लोग मोबाइल, भोजपुरी चैनलों पर सुबह से रात तक छठ के ही गीत चल रहे हैं। वहीं रेलवे स्टेशनों पर छठ के गीत बजने लगे हैं। बनारस, वाराणसी, वाराणसी सिटी, छपरा, सीवान सहित 15 जगहों पर छठ पूजा तक गीत बजते रहेंगे।
चांदी के सूप की डिमांड, रोज हो रही पांच किलो की खपत
छठ महापर्व पर इस बार सराफा बाजार में चांदी के बने सूप की डिमांड है। साइज में छोटे से सूप देखने में काफी आकर्षक लग रहे हैं। सराफा कारोबारियों के मुताबिक, वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल में इन दिनों रोज करीब पांच किलोग्राम चांदी के सूप की खपत हो रही है।
रोज करीब 10 लाख रुपये कारोबार हो रहा है। रेशम कटरा, सुड़िया, ठठेरी बाजार, गोविंदपुरा, चौक, बड़ादेव के सराफा दुकानों पर इसकी डिमांड ज्यादा है। पूर्वांचल के कारोबारी यहां से चांदी के बने सूप और अन्य सामान बेचने के लिए ले जा रहे हैं। चांदी से बने इन सूप का वजन 10 ग्राम से लेकर 200 ग्राम तक है। सराफा कारोबारी आकाश सराफ के अनुसार, इस वर्ष छठ पर्व के साथ ही आने वाले लगन के सीजन की शुरुआत होने से चांदी के उत्पादों की मांग ज्यादा है।
चांदी के सूप बाजार में 10 ग्राम से लेकर 200 ग्राम तक के विभिन्न आकारों में उपलब्ध हैं। कई परिवार इन सूपों को पूजा के साथ-साथ घर की संपत्ति और शुभता के प्रतीक के रूप में भी सहेजकर रखते हैं। काशी सराफा मंडल के अध्यक्ष रवि सराफ का कहना है कि छठ पर लोग चांदी के सूप को आस्था से जोड़ कर देख रहे हैं।
दउरा और सूप से शुरू की खरीदारी
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी शनिवार को छठ नहाय खाय के साथ चार दिवसीय सूर्य षष्ठी का महापर्व डाला छठ शुरू होगा। मगर, शुक्रवार को दउरा, सूप, डलिया के साथ खरीदारी शुरू हो गई। बाजार में सजी अस्थायी दुकानों पर दिनभर मोलभाव के साथ खरीदारी के लिए खासकर महिलाएं जुटी रहीं।
शनिवार से पूजन सामग्रियों में फलों और सब्जियों की भी खरीदारी शुरू हो जाएगी। पूजा में लगने वाले बांस के सामान और मेवे में तेजी है। छठ पर महिलाएं 36 घंटे निराजल व्रत रखेंगी।
महिलाओं ने खासकर बांस की टोकरियां, सूप, दउरा, डलिया, पीतल के सूप, लोटा-थाली, कोसी, परई, दीया खरीदा। दउरा 200 से 300 रुपये, सूप 50 से 90 रुपये और डलिया 50 से 100 रुपये पीस बिका। इसके अलावा साठी का चावल, सोपाड़ी, गुड़, नया चावल, महावर पूजा के लिए नए कपड़ों की खरीदारी हुई। दुकानदार नंदलाल गुप्ता ने बताया कि पूजन सामग्री में 20 फीसदी की तेजी है।