हिंदी के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह की स्मृति में सम्मान देने की घोषणा हुई। पहला केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान हिंदी जगत के अचिंत और मराठी जगत के संदीप जगदाले को दिया जाएगा। शुक्रवार को साखी के संपादक और केदारनाथ स्मृति सम्मान के संयोजक सदानंद शाही ने केदारनाथ सिंह के जन्मोत्सव पर घोषणा की। प्रो. शाही ने बताया कि हिंदी के लिए पटना विश्वविद्यालय के अचिंत को उनके कविता संग्रह ‘शहर पढ़ते हुए’ को दिया जाएगा। भारतीय भाषाओं में यह सम्मान औरंगाबाद महाराष्ट्र के मराठी कवि संदीप जगदाले को उनके संग्रह ‘असो आता चाड’ के लिए दिया जाएगा।
स्मृति व्याख्यान शृंखला के तहत लोक आधुनिकता की अंतरंगता के विरल कवि केदारनाथ सिंह विषय पर मुख्य वक्ता उदय प्रकाश ने कहा कि केदारनाथ के भीतर एक डरा हुआ बच्चा है जो उन्हें कवि बनाता है। सूचनाओं के उत्पादन के दौर में केदारनाथ सिंह लगभग सत्ता हीन शख्सियत थे लेकिन उनकी कविताएं ब्रह्मांड नामक अखबार का संवाददाता बनाती हैं, ऐसा संवाददाता जो समय के आतंक से निरपेक्ष रहकर भूमिका निभाता है। अध्यक्षता कर मलयालम के कवि के. सच्चिदानंदन ने कहा कि केदार जी के यहां सिर्फ कविताएं बोलती हैं, कवि को अलग से वक्तव्य देने की जरूरत नहीं पड़ती। वह भारतीय कविता की नहीं बल्कि हमारे पूरे समय की महत्वपूर्ण आवाज थे। केदारनाथ सिंह के पुत्र सुनील कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन कर कहा कि मैंने पिता जी को हमेशा समय के आतंक से मुक्त पाया है। संचालन सदानंद शाही ने किया।
भविष्य को रचती है अचिंत की कविताएं
केदारनाथ स्मृति सम्मान के लिए पांच सदस्यीय चयन समिति गठित की गई थी। समिति में ए अरविंदाक्षन, चंद्रकांत पाटिल, राजेश जोशी, अरुण कमल तथा अनामिका सदस्य थे। प्रो. शाही ने बताया कि हिंदी की साहित्यिक पत्रिका साखी ने केदारनाथ सिंह की याद में 2021 से दो युवा कवियों को हर साल केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान देने का निर्णय लिया था। इसके लिए देश-विदेश के कवियों, लेखकों, आलोचकों और संपादकों से संस्तुतियां आमंत्रित की गई थीं। निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से दोनों का चुनाव किया। समिति के संयोजक अरविंदाक्षन ने कहा है कि अंचित की कविता समय के साथ के उनके गहन संबंध को व्यंजित करती है। उनकी कविता वर्तमान की है, पर वह भविष्य को रचती है। संदीप जगदाले की कविताएं तीव्रता के साथ जमीन और देहात से जुड़ी यातनाओं को अभिव्यक्त करती हैं।