तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ की स्थापना के लिए एक कदम और बढ़ गया है। विद्यापीठ में कबीरपंथी संतों के जीवन-दर्शन पर अध्ययन-अध्यापन, शोध एवं विविध आयोजन किए जाएंगे।
लगभग सोलह करोड़ की लागत से बनने वाले विद्यापीठ के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। कबीर मूलगादी के पीठाधीश्वर संत विवेक दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ खुलेगी।
शिक्षा और शोध के साथ ही यहां संत कबीरदास के अलावा उनके समकालीन तथा उसके बाद के 150 संतों की स्मृतियों को भी यहीं सहेजा जाएगा। संत रैदास, सेन भगत, संत दादू, संत पीपा महाराज, संत हरिव्यास, संत नामदेव, संत एकनाथ, संत सुंदर दास, शंकर देव और वामदेव इनमें प्रमुख हैं।
वर्तमान पीढ़ी को मध्यकालीन संतों और तत्कालीन सामाजिक स्थिति संग साहित्य से परिचित कराया जाएगा। संत कबीर से जुड़े साहित्य का प्रकाशन यहीं से होगा। कबीर पार्क, आर्ट गैलरी, सेमिनार हॉल तथा दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों के रहने के लिए साधक निवास का निर्माण भी कराया जाएगा।