गांवों की चीजों को बचाना है तो देवताओं से जोड़ दिया
इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च ने इसके लिए यूपी कॉलेज को 12 लाख रुपये का फंड दिया है। इसके प्रोजेक्ट डायरेक्टर ग्रामीण समाजशास्त्री डॉ. सुधीर कुमार राय ने बताया कि गांवों में पीपल, नीम, कटहल, जानवर, पक्षी, फसल जैसी चीजों को बचाना है तो उसे लोगों ने देवताओं से जोड़ दिया गया है। जैसे निमिया के डार मईया झूलेली झूलनवा... गीत बने। ऐसे ही कहार गीत, धोबी गीत, कजरी, लोकगीतों में कुल देवताओं का अध्ययन किया जाएगा।
12 लाख का फंड मिला, दो साल में पूरा होगा रिसर्च
प्रो. राय ने बताया कि 15 जनवरी से रिसर्च का काम शुरू हो गया है जो कि दो साल में पूरा होगा। बनारस के अलावा, गोरखपुर, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, आजमगढ़, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, देवरिया आदि जिलों के कुल देवताओं को सहेजा जाएगा। इस प्रोजेक्ट में प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह्र प्रो. एस के द्विवेदी और प्रो. गोरखनाथ भी शामिल हैं।
यूपी कॉलेज के प्रस्ताव को आईसीएसएसआर ने स्वीकारा है। अब पूर्वांचल के सुदूर गांवों में जाकर अगले दो साल तक कुल देवताओं का सर्वे कराया जाएगा। हर गांव में एक या दो देवता भी हो सकते हैं जिन पर रिसर्च किया जाएगा। मुंडन, जनेऊ संस्कार, शादी विवाद सहित कई मौकों पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी क्या प्रासंगिकता है इसे भी तलाशा जाएगा। आखिरकार क्यों कई हजार साल से इनकी पूजा होती चली आ रही है। -प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह, को-डायरेक्टर और प्राचार्य, यूपी कॉलेज