वाराणसी। सावन के पहले दिन शनिवार को बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए कांवरिया भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। कंधे पर कांवर लेकर नंगे पैर बोल बम के जयकारे लगाते हुए भोले भक्त सड़कों पर निकल पड़े। दोपहर के वक्त कोतवालपुरा गली में भक्तों की लंबी कतार लगी। भक्तों की भीड़ बढ़ने के साथ ही काशी पर भक्तिभाव का केसरिया रंग चढ़ गया है। दोपहर बाद भोले भक्तों की सेवा के लिए शहर में तीन स्थानों पर शिविर खोल दिए गए। वहां ठहरने, खाने के साथ ही चिकित्सा के भी इंतजाम मिलेंगे।
कांवरियों के 25-50 के समूह में भक्तों के जत्थे काशी पहुंचने लगे हैं। गंगा का जलस्तर बढ़नेे की वजह से दशाश्वमेध घाट और शीतला घाट पर स्नान के लिए पर्याप्त जगह नहीं रह गई है लेकिन भक्त गिनती की सीढ़ियों पर स्नान कर बाबा दरबार की ओर बढ़ने लगे हैं। शनिवार की सुबह से ही दशाश्वमेध से सरस्वती फाटक और गोदौलिया से बांसफाटक-कोतवालपुरा होते हुए भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। कांवरियों
की काशी में भीड़ शुरू होते ही सेवा के लिए अलग-अलग जगहों पर शिविर खोल दिए गए। चितरंजन पार्क में शिव शक्ति कांवरिया तीर्थयात्री सेवा शिविर का उद्घाटन शाम छह बजे शहर दक्षिणी के विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा, मेयर राम गोपाल मोहले ने किया। शिविर के संयोजक पार्षद नरसिंह दास ने बताया कि महीने भर में करीब डेढ़ लाख से अधिक भक्तों के भोजन की व्यवस्था की गई है। नंगे पैर आने वाले जिन भक्तों के पैरों में छाले पड़े होंगे, उनके इलाज के लिए तीन चिकित्सक भी तैनात रहेंगे। बाबा काशी
विश्वनाथ भक्त सेवा समिति की ओर से सिंधी धर्मशाला लक्सा में सविधि पूजा के बाद शिविर खोला गया। समिति के संरक्षक शांति लाल जैन, अध्यक्ष शिव शंकर वर्मा, उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला की मौजूदगी में शिविर खोला गया। इस शिविर में ठहरने, खाने के अलावा मनोरंजन के भक्ति संगीत की भी व्यवस्था की गई है। रथयात्रा चौराहे पर गोपाल सिंह की अध्यक्षता में काशी कांवरिया शिविर का भी उद्घाटन देर शाम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ।