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बच्चों की उपस्थिति रही कम शिक्षकों का होता रहा इंतजार

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वाराणसी। करीब सवा महीने ग्रीष्मावकाश के बाद एक जुलाई से स्कूलों का नया सत्र शुरू हो गया, लेकिन पहले दिन छात्रों की उपस्थिति बहुत कम रही। प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई तो हुई, लेकिन छात्राें को शिक्षकों का भी इंतजार करना पड़ा। यहां तक कि बच्चों को ही झाड़ू भी लगाना पड़ा। कम छात्र संख्या की वजह से कई प्राथमिक विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के तहत रैली भी नहीं निकल सकी। ऐसा तब हो रहा है जब पहले से ही स्कूल खुलने का समय तय था और पठन-पाठन का माहौल बनाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई थी।
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जब बच्चे ही नहीं तो कैसे निकालें रैली
बच्चे ही नहीं पहुंचने के कारण कई सरकारी विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के तहत रैली नहीं निकाली जा सकी। पिशाचमोचन स्थित प्राथमिक विद्यालय में सुबह 8 बजे तक छात्र ही नहीं पहुंचे थे, यहां शिक्षक बच्चों के आने का इंतजार करते रहे। लहुराबीर प्राथमिक विद्यालय में भी बच्चों की संख्या कम रही। रोहनिया के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षक तो पहुंचे, लेकिन बच्चों की उपस्थिति कम रही। प्राथमिक विद्यालय हरदत्तपुर, जगतपुर, दाउदपुर, अखरी, प्रयागपुर, टोडरपुर में शिक्षक बच्चों का इंतजार करते रहे। पिंडरा के प्राथमिक विद्यालय में बच्चे कम होने की वजह से स्कूल चलो अभियान की रैली नहीं निकल सकी। चोलापुर, राजातालाब, सेवापुरी के स्कूलों में भी बच्चों की संख्या कम रही।
बिना जूता, ड्रेस के पहुंच गए स्कूल
पहले दिन कई बच्चे बिना ड्रेस के ही स्कूल पहुंच गए। बताया गया कि बच्चों को जूते और ड्रेस नहीं मिल पाए हैं। राजातालाब के शहंशाहपुर, नरोत्तमपुर, जक्खिनी, जयापुर, चंदापुर, कचनार आदि गावों के स्कूलों में कई बच्चे बिना ड्रेस के स्लीपर पहनकर विद्यालय आए। प्राथमिक विद्यालय मोहनसराय के बच्चों को भी ड्रेस और किताब नहीं मिल पाई है, इसलिए यहां भी बच्चे साधारण ड्रेस में आए। सेवापुरी क्षेत्र में भी कई विद्यालयों में बच्चे ड्रेस में नहीं नजर आए। चोलापुर में भी यही स्थिति रही।
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बच्चों ने खोला स्कूल, लगाया झाड़ू, नहीं पहुंचे शिक्षक
कुछ ऐसे स्कूल भी रहे जहां बच्चों को ही स्कूल का गेट खोलना पड़ा। न तो कोई शिक्षक पहुंचा और न ही कोई कर्मचारी। शहर के ही पिशाचमोचन प्राथमिक कन्या विद्यालय में बच्चे ही झाड़ू लगाते मिले। यहां शिक्षक तो थे, लेकिन आराम करते रहे। 32 में से आधे बच्चे ही यहां आए थे। रमाकांत सेवा संस्थान माध्यमिक कन्या विद्यालय में जमीन पर ही बैठाकर बच्चों को पढ़ना पड़ा। यहां बैठने की कोई सुविधा नहीं थी। उधर, प्राथमिक विद्यालय नवाबगंज गुरुधाम में बच्चों ने ही स्कूल का गेट खोला। 8.15 बजे तक यहां कोई नहीं पहुंचा।
समय को लेकर उहापोह में अभिभावक
जिले के स्कूलों का समय सुबह 7 से 11.30 बजे तक निर्धारित किया गया था लेकिन इसे लेकर उहापोह की स्थिति रही। कुछ निजी स्कूलों में 7.30 से 12 बजे तक की नोटिस लगी रही तो कहीं 12.30 बजे तक। कुछ ऐसे विद्यालय भी रहे जहां यूकेजी तक के छात्रों की छुट्टी 12 बजे हो गई, लेकिन इससे ऊपर की क्लास वालों को दो बजे घर जाने को मिला।
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