65 वर्षीय श्रद्धालु मुन्नू लाल यादव ने कहा कि श्रृंगार होने के कारण आरती एक घंटे पहले शुरू की गई थी। गर्भगृह के एक गेट को आरती के दौरान बंद कर दिया जाता है। उसी कोने में हल्की चिंगारी से लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। भीड़ में दबने से सांस फूलने लगी। किसी ने हाथ पकड़ कर बहार निकाला, जिससे जान मुश्किल से बची। घटना का जिक्र करते समय उनके हाथ पैर कांप रहे थे।
स्थानीय निवासी प्रदीप ने बताया कि सप्तऋषि आरती के दौरान कपूर की लौ से रुई में आग लगी। मोहल्लेवासियों ने मंदिर में मौजूद समरसेबल पंप से पानी डालकर करीब 25 मिनट में आग बुझा दी। आग से मंदिर के शीशे, पंखे, लाइट और बोर्ड जलकर खराब हो गए। बाबा का आशीर्वाद था कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
मंदिर में शुरू हो गया पूजा-पाठ
भोर में पांच बजे आरती के बाद मंदिर को सामान्य दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया गया। सुबह आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ने मंदिर पहुंचकर दर्शन किया और घायलों का हालचाल लिया।