मंदिर के पुजारी रविनाथ मिश्रा ने पुलिस को बताया कि हर साल की तरह इस बार भी सावन माह की पूर्णिमा पर आत्म विश्वेश्वर महादेव मंदिर में शृंगार और विशेष पूजा आरती होती है। इस साल मंदिर परिसर को रूई से सजाया गया था। गर्भ गृह में सप्तऋषि आरती के दौरान रात 8 बजे दीपदान बाहर निकाला जा रहा था। मंदिर का गेट छोटा है। दीपदान की लपटों से रूई में आग लग और मंदिर परिसर में फैल गई।
अंदर और बाहर रूई से भव्य सजावट हुई थी। इस कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। मंदिर में अफरा-तफरी मच गई। श्रद्धालु इधर-उधर भागने लगे। इस बीच आग की चपेट में आकर सात लोग गंभीर रूप से झुलस गए। पुजारी के मुताबिक, जिस वक्त आग लगी थी उस समय मंदिर परिसर में 30 से ज्यादा दर्शनार्थी मौजूद थे।
मंदिर से आग की लपट देख और श्रद्धालुओं की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे और झुलसे हुए लोगों को इलाज के लिए मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा ले गए। सूचना पाकर चौक थाने की पुलिस और फायर ब्रिगेड की बाइक दमकल मौके पर पहुंच गई। इससे पहले ही स्थानीय लोगों ने पानी फेंक कर आग पर काबू पा लिया था। आग से मंदिर सामान जल गया।
महमूरगंज स्थित जीएस मेमोरियल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सुबोध ने बताया कि छह लोग भर्ती हैं। सभी का उपचार किया जा रहा है। सानिध्य, प्रिंस और शिवांग मिश्रा 25 फीसदी, सत्यम पांडेय 20 फीसदी और कृष्णा 12 फीसदी और बैकुंठ 10 फीसदी तक झुलसे हैं। प्रिंस पांडेय मिर्जापुर स्थित विंध्याचल मंदिर के पुजारी हैं।
आग से झुलसे सात मरीज भर्ती कराए गए थे। प्राथमिक उपचार किया गया। बेहतर उपचार के लिए बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर और निजी अस्पताल के लिए रेफर किया गया। -डॉ. मृदुला मलिक, एसआईसी, मंडलीय अस्पताल कबीर चौरा
जिले के सरकारी अस्पतालों में प्लास्टिक सर्जन पिछले 10 साल से नहीं हैं। इस वजह से आग लगने या अन्य कारणों से झुलसने वाले मरीजों का मुकम्मल इलाज नहीं हो पाता है। जब भी इस तरह की घटना होती है तो निजी अस्पतालों के भरोसे ही मरीज का इलाज कराया जाता है। शनिवार को हुई घटना में यही हुआ। मंडलीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार करने के बाद प्लास्टिक सर्जन ना होने के कारण मरीजों को महमूरगंज स्थित निजी अस्पताल में ही भेज कर इलाज करवाना पड़ा।
मंडलीय अस्पताल में 20 बेड का वार्ड है लेकिन कोई प्लास्टिक सर्जन नहीं है। डॉक्टर एके प्रधान के सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक किसी की तैनाती नहीं हो पाई। बीएचयू अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भी केवल 9 बेड का वार्ड है। यहां भी बनारस के अलावा पूर्वांचल के अन्य जिलों के मरीजों को भी रेफर किया जाता है।