बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे बजे दुकान में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। आग फैलते हुए दूसरे तल तक पहुंच गया। धुएं से दम घुटने पर सभी की नींद खुली। जयप्रकाश और उसकी पत्नी बच्चे को लेकर सुरक्षित निकलने के लिए सीढ़ी की तरफ गए तो वो आग की चपट में आ चुका था।
इसके बाद सभी छत पर गए और पड़ोसी (जयप्रकाश) के घर से होकर किसी तरह नीचे उतरे। पड़ोसियों ने खूब मद की। आग के कारण घर की दीवारें और छत फट गई। आग की चपेट में पूरी गृहस्थी जलने के बाद भी लालचंद और उनके बेटे और बहू एक बात कह रहे थे कि भइया पड़ोसी भगवान बनकर बचा लिए। वरना चार लोग जिंदा जलकर मर गए होते। लाखों का नुकसान हुआ है मगर तकलीफ नहीं है।
लालचंद और उनके बेटे जयप्रकाश का आरोप रहा कि सूचना देने के एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड की टीम एक घंटे की दरी से पहुंची। आरोप लगाया टीम ने जयप्रकाश को ही पानी का पाइप थमा दिया।