स्थापना दिवस समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते कलाकार।
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वक्ताओं ने अपने फिल्मी सफर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि फिल्म जगत से उनका जुड़ाव कैसे हुआ और इस क्षेत्र में औपचारिक शिक्षा तथा निरंतर अध्ययन का कितना महत्व है। चर्चा के दौरान भारत में विज्ञान-कल्पना (साइंस फिक्शन) फिल्मों के अपेक्षित सफलता न मिलने के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया।
पूरी बातचीत का समापन इस विचार के साथ हुआ कि साहित्य और सिनेमा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक माध्यम हैं, जो मिलकर समाज और मानवीय संवेदनाओं को अधिक प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। कार्यक्रम में सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल भी उपस्थित रहे।
पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया के सुरों में घुली मिठास
नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस समारोह के अंतिम दिन सुर, लय और ताल से सजी संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात कबीर भजन गायक पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने कबीर के पदों के माध्यम से जीवन के मूल तत्वों का बोध कराया, जबकि कश्यप बंधुओं ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति से बनारस घराने की गायकी की मिठास का एहसास कराया।