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Varanasi News: बीएचयू के 50 छात्रों की टाइपो पाठशाला लगी, गौदोलिया में 3 घंटे घूमकर साइनबोर्ड, लिपि-भाषा का किया अध्ययन

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बीएचयू के एप्लाइड आर्ट्स विभाग की ओर से काशी की गलियों में टाइपोग्राफी की जीवंत पाठशाला लगी। दृश्य कला संकाय के इस टाइपो-पिकनिक में 50 छात्र-छात्राओं ने गोदौलिया चौराहे से स्ट्रीट मार्केट होते हुए दशाश्वमेध क्षेत्र में तीन घंटे भ्रमण किया। काशी के बाजारों में प्रचलित टाइपोग्राफी का अध्ययन किया।
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विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने हाथ से लिखे साइनबोर्ड, मिश्रित लिपि (देवनागरी और लैटिन) वाले बोर्ड और स्थानीय बाजारों की दृश्य भाषा का विश्लेषण किया। संस्कृत-अंग्रेजी द्विभाषी साइनबोर्ड का अध्ययन किया गया। इसे इस क्षेत्र में सुविचारित टाइपोग्राफी का दुर्लभ उदाहरण माना गया। मुख्य फोकस अक्षर को उनकी संरचनात्मक तर्क प्रणाली, सामग्री, सतह उपचार, स्थानिक व्यवस्था और कार्यात्मक संदर्भ को समझने पर रहा। साथ ही भारतीय वर्नाक्युलर टाइपोग्राफी की हाइब्रिड प्रकृति को पहचाना गया। काशी की सड़कों पर प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से छात्रों ने अक्षरों को केवल डिजाइन ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की दृश्य संस्कृति के हिस्से के रूप में समझा। प्रो. मनीष अरोड़ा ने कहा, यह शहर सदियों से टाइपोग्राफी सिखा रहा है। हमने केवल छात्रों को वह दृष्टि दी, जिससे वे दीवारों पर लिखी भाषा को पढ़ सकें। टाइपो-पिकनिक वास्तव में जीवन के बीचों-बीच सीखने का माध्यम है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन अभिषेक वर्धन सिंह और संयोजन कृष्णा सिंह ने किया।
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