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Varanasi News: संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा; तबले-नृत्यांगना के बीच 10 मिनट चला सवाल-जवाब

Mon, 21 Apr 2025 12:20 AM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवी निशा पर श्रोता मुग्ध होते दिखाई दिए। एक साथ तीन घरानों बनारस, लखनऊ और जयपुर के स्टाइल में दिल्ली की नयनिका घोष ने कथक किया। बिना प्लान के पहली प्रस्तुति हुई और तबले-नृत्यांगना के बीच 10 मिनट तक सवाल-जवाब चला। 
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कथक प्रस्तुती देती नृत्यांगना - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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दिल्ली की नयनिका घोष ने बनारस, लखनऊ और जयपुर तीनों घरानों के कथक नृत्य से श्रोताओं को संशय में डाल दिया। थाल की दोनों शिराओं पर पैर रखकर करीब पांच मिनट तक उन्होंने नृत्य किया तो ऐसा लगा ही नहीं कि वह एडवांस स्टेज के कैंसर से पीड़ित थीं। 30 कीमोथेरेपी ले चुकीं कथक नृत्यांगना की ऊर्जा देख दर्शक अवाक रह गए।तबले की थिरकिट पर थाल के साथ वह दो फीट आगे-पीछे खिसककर नृत्य करती रहीं।
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10 मिनट तक तबले और नृत्यांगना के घुंघरुओं के बीच सवाल-जवाब का भी दौर चला। कथक कलाकार ने ता थइया और तबला वादक ने ना-धिन-धिन-ना की भाषा में एक-दूसरे के सवालों के जवाब दिए तो श्रोता उसे डिकोड करने में लग गए। नयनिका घोष ने कथक से मां गंगा के विहंगम स्वरूप को बताते हुए भगवान राम की वंदना की। मानस और सुंदरकांड में सीता-हनुमान के प्रसंग को नृत्य में करके दिखाया।

गुरु पं. विजयशंकर और पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज के सानिध्य में नृत्य की शिक्षा ले चुकीं नयनिका घोष ने तीन ताल में उठान, आमद, परन, रेला, चक्करदार परन, फरमाइशी परन, घुंघरुओं का चलन किया। पं. बिंदादीन महाराज की ठुमरी मुझे छेड़ो न नंद के सुनहु छैल... पर बड़े भाव-भंगिमा के साथ नृत्य की प्रस्तुति दी।
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तबले पर उस्ताद अकरम खां, पखावज पर महावीर गंगानी, सितार पर रईस खां ने संगत की। बोलपढ़ंत मयूख भट्टाचार्य और गायन समीउल्ला खां ने किया।

30 बार कीमोथेरेपी कराई। 2019 में एडवांस स्टेज के कैंसर पता चला। डॉक्टरों ने कह दिया था कि इस बीमारी में कोई बचता ही नहीं है। लेकिन, वह कैंसर फाइटर के तौर पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो गईं। उनका कहना है कि कैंसर से सुरक्षित रखने में इलाज के बाद दूसरा बड़ा सहारा योग-प्राणायाम और तीसरा कथक ही रहा है। वह 5 साल की उम्र से ही कथक सीख रही हैं।

चलो रे मन गंगा-जमुना तीर

संकटमोचन संगीत समारोह पांचवीं निशा में अचानक से एक प्रस्त़ुति जोड़ी गई। प्रयागराज के ऋषि मिश्रा ने ख्याल और राग शुद्ध कल्याण में गायन किया। ‘शिव शंकरा’ बंदिश सुनाने के बाद ‘मन में विराजे राम’और एक ताल में ‘जय प्यारे हनुमान’ की बंदिशें पेश कीं। फिर ‘चलो रे मन गंगा जमुना तीर’ भजन से गायन का समापन किया।
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