जेल में बंद होने पर महिला गर्भवती थी। जेल में ही उसने बालिका को जन्म दिया। तब से वह जेल में बंद थी। लॉकडाउन के दौरान बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने पहली सजा सुनाते हुए महिला को चार वर्ष कैद और पांच सौ जुर्माने की सजा सुनाई। महिला की चार वर्ष की सजा पूरी हो चुकी थी तो जेल अधीक्षक अनिल राय ने उसे जेल से रिहा किया।
उसे लेने घर का कोई सदस्य नहीं आया तो जेल प्रशासन ने गाड़ी से उसे उसके घर भेजवाया। घर पहुंचने पर महिला के माता-पिता और भाई ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि उसने गांव की बालिका का अपहरण किया, बिना शादी किए गर्भवती होकर बालिका को जन्म दिया। उसके कृत्य से परिवार के लोग आहत है। इस कारण उसे नहीं अपना सकते।