इस मामले में मृतका के देवर राजीव सिंह पटेल ने कपसेठी थाने में हत्यारोपी राखी वर्मा सहित उसके परिवार के पांच सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना में अन्य इस वारदात में शामिल नहीं मिले। कोर्ट में अभियोजन सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष तिवारी ने घटना से पहले दोनों के बीच अंतरंग स्थिति की संभावना व्यक्त की गई थी। आरोपी महिला के बयान में हत्या की पीछे की वजह भी समलैंगिकता आई।
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फावड़े से लगी चोटों, शॉक से मौत की पुष्टि
पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक की गवाही में आया कि मृतका की मौत अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेजिक शॉक) से हुई, जो मृत्यु से ठीक पहले लगी गंभीर चोटों के कारण हुई थी। शव पर धारदार और कुंद दोनों प्रकार की चोटें मिलीं, जिनमें छाती पर गहरा घाव था। चोटें एक ही औजार से की गईं। जिसका कुछ हिस्सा धारदार और कुछ कुंद था। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में फावड़े सहित कई वस्तुओं पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई, जबकि विसरा जांच में रासायनिक विष के अंश नहीं मिले।
गले, चेहरे और छाती पर धारदार हथियार से कई वार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की हत्या बेहद नृशंस तरीके से किए जाने की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के गले, चेहरे और छाती पर धारदार हथियार से कई गहरे वार किए गए थे। गले पर चार बड़े घाव मिले, जिनमें दो बोन-डीप थे। चेहरे के दाहिने हिस्से पर भी धारदार हथियार के दो घाव पाए गए। छाती पर 18 सेंटीमीटर लंबा गहरा चीरा था। रिपोर्ट में बताया गया कि शव पर रिगर मॉर्टिस पूरे शरीर में मौजूद था। आंख और मुंह खुले थे, जबकि जीभ और नाखूनों पर हल्की नीलिमा दिखाई दी। मृतका के कपड़े और शरीर खून से सना हुआ था।
प्रधानी की रंजिश में फंसाया
बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध थे। एक-दूसरे का घर पर आना जाना था। ऐसे में क्यों घर पर बुलाकर हत्या की जाएगी। आरोपी को प्रधानी की रंजिश में फंसाया गया, राखी 2021 में प्रधानी का चुनाव लड़ी थी। घटना का कोई चौथा गवाह नहीं है। जिसने हत्या करते देखा हो। घटना में किसी दूसरे की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता।
पुलिस जांच में क्या आया
आरोपी के बयान के अनुसार, हत्या का कारण दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध रहा। दोनों सहेली रहीं। एक-दूसरे के यहां आना जाना रहा रहा। आरोपी चाहती थी कि उसके साथ रहे। कोर्ट में भी इस बात का जिक्र बचाव और अभियोजन पक्ष की ओर से किया गया।
अभियोजन ने फांसी की मांग की, अदालत ने कहा उस श्रेणी में नहीं
30 जून को दोपहर बाद दंड के बिंदु पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने इसे बर्बर और अमानवीय कृत्य बताते हुए मृत्युदंड (फांसी) की मांग की, जबकि न्यायमित्र (बचाव पक्ष) ने अभियुक्त के महिला होने और भविष्य का हवाला देते हुए कम से कम सजा की गुहार लगाई। न्यायालय ने माना कि यह मामला फांसी की श्रेणी में नहीं आता है।