सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी में एक खदान में हादसे के बाद जुटी भीड़
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उधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मसले पर जिलाधिकारी से मिलकर खदानों की मापी कराने, सुरक्षा मानकों तथा अब तक हुए खनन की जांच कराने की मांग की। भाजपा नेता ने कहा कि जिले में शायद ही किसी खदान में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अधिकांश खदानों में अवैध खनन हो रहा है।
आरोपों की जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने खनन विभाग के अधिकारियों व खदान संचालकों पर मिलीभगत करके करोड़ों रुपये राजस्व की क्षति पहुंचाने का आरोप भी लगाया। बताया कि जिलाधिकारी से शनिवार को मिलकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है।
फार्म बी और डी भी नहीं भरा जा रहा
अब जबकि एक बार फिर 2012 जैसी घटना की पुनरावृत्ति की बात सामने आ रही है तो यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार क्यों की जा रही है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आलम यह है कि फार्म-बी और डी तक नहीं भरा जा रहा है। दरअसल, फार्म-बी में खदान में उतरने वाले श्रमिक का पूरा विवरण होता है जबकि फार्म-डी में श्रमिक खदान में कब उतरा और कब निकला, उसका पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया नियमित की जानी चाहिए लेकिन शायद ही किसी खदान में यह प्रक्रिया मानकों के अनुरूप पूरी की जा रही हो।
खनन विभाग अवैध खनन से कर रहा इंकार
यह बात अब किसी से नहीं छिपी रही कि जिले में अवैध पत्थर व बालू खनन का धंधा सिंडिकेट बनाकर चलाया जा रहा है। करीब ढाई महीने पहले लखनऊ से आई टीम की जांच में निर्धारित से ज्यादा क्षेत्र में पत्थर खनन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी सहित अन्य कमियां मिलने प्रशासन की तरफ से 18 खदान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उस दौरान यह कहा गया था कि राजस्व को हुई क्षति की भरपाई खदान संचालकों से जुर्माना वसूलकर की जाएगी।
लेकिन आरोपी खदान संचालकों से कितना जुर्माना वसूल किया गया और अवैध खनन पर और क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में खनन विभाग के अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, सूत्रों का कहना है कि कई कागजों में हेराफेरी कर कई खदानों में पत्थर खनन कराया जा रहा है।
खान अधिकारी केके राय का कहना है कि जिले में वर्तमान में 41 खदानों में पत्थर खनन का कार्य चल रहा है। उनका यह भी कहना है कि जिल में अवैध रूप से खनन के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। अवैध खनन की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।