16 किलोमीटर साइकिल चलाने के बाद शुरू होती थी प्रैक्टिस
बचपन से ही पूजा स्पोर्ट्स में कुश्ती में रूचि थी। पूजा ने बताया कि कोच ने पिता से कह दिया कि इसे पहलवान बनाइए। संसाधनों की कमी के चलते इंटरनेशनल पदक तक का सफर आसान नहीं था। डाॅ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम सिगरा में कुश्ती का प्रशिक्षण लेने पूजा गांव से साइकिल से आती-जाती थीं। उन्हें 16 किलोमीटर साइकिल चलानी होती थी। कठिन परिश्रम से पूजा ने यह मुकाम हासिल किया। पूजा ने बताया कि उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल में नौकरी मिल गई है।
स्पोर्ट्स कोटे से पूजा को नौकरी मिल गई, लेकिन उनका मन आज भी खेल के लिए समर्पित है। पूजा का संघर्ष अन्य बालिका खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। - गोरख यादव, कोच।