वाराणसी में रबी की फसल की कटाई के बाद धान की रोपाई से पहले किसान वैज्ञानिक विधि से खाली खेतों में हरी खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाकर अच्छी पैदावार कर सकते हैं। इसके लिए ढैंचा के अलावा सनई लोबिया और मूंग भी विकल्प है। लेकिन अब लोबिया मूंग की बुआई का समय निकल चुका है।
जो अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही बुवाई कर फली तोड़कर जुताई की जाती है। फिलहाल किसान 15 मई से पहले सनई और ढैंचा की बुआई कर सकते हैं। बीएचयू से सेवानिवृत्त कृषि विशेषज्ञ प्रो. आरसी तिवारी ने बताया कि हरी खाद का इस्तेमाल कर किसान 25 प्रतिशत तक मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ा सकते हैं।
ढैंचा और सनई की बुआई के 40 से 50 दिन बाद जुताई कर एक सप्ताह बाद धान की रोपाई करे सकते हैं। कृषि विभाग की ओर से इस वर्ष जिले सभी विकास खंडों 40-40 क्विंटल ढैंचा का बीज वितरण के लिए भी भेजा जा चुका है। हालांकि सनई किसान बाजार से खरीद सकते हैं।