पत्नी की मौत से शुरू हुआ दुखों का सिलसिला
परिजनों के अनुसार आशा देवी कुछ समय से बीमार चल रही थीं। उन्हें दिमागी बीमारी और पाइल्स की शिकायत थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई थी। उन्हें सांस लेने में भी परेशानी होने लगी थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्थानीय स्तर पर ही उनका इलाज चल रहा था। इसी बीच शनिवार को उनकी मौत हो गई। पत्नी की मौत से शिवचंद और उनके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार को शिवचंद की बुजुर्ग मां जोनिहा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। कुछ ही देर बाद उनकी भी मौत हो गई। एक ही परिवार में लगातार दूसरी मौत से घर में कोहराम मच गया।
मां जोनिहा, आशा देवी और बेटी प्रीति की फाइल फोटो।
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मां के अंतिम संस्कार से लौटे तो बेटी की मौत की मिली खबर
उधर, प्रीति की तबीयत भी लगातार खराब चल रही थी। परिजनों के अनुसार उसे सर्दी-जुकाम, कमर दर्द और खून की कमी थी। प्लेटलेट्स भी काफी कम हो गए थे। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे इलाज के लिए वाराणसी के ट्रामा सेंटर ले गए। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था। परिजनों ने इलाज के दौरान कई यूनिट रक्त की भी व्यवस्था की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मंगलवार को परिवार के लोग जोनिहा का अंतिम संस्कार करने के बाद घर लौटे ही थे कि वाराणसी से प्रीति की मौत की खबर आ गई। कुछ घंटे पहले जिस घर में बुजुर्ग मां की अंतिम विदाई का गम था, वहीं बेटी की मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह झकझोर दिया। प्रीति की मौत की सूचना गांव में पहुंचते ही लोग स्तब्ध रह गए। ग्रामीण बड़ी संख्या में शिवचंद के घर पहुंचने लगे।
कर्नाटक में मेहनत कर बच्चों का भविष्य संवार रहा था शिवचंद
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण शिवचंद कई वर्षों से कर्नाटक में रहकर वेल्डिंग का काम करते थे। उनका मकसद परिवार का खर्च चलाने के साथ बच्चों का भविष्य संवारना था। बेटे मनन की पढ़ाई में रुचि कम होने पर करीब एक वर्ष पहले उसे भी अपने साथ कर्नाटक ले गए थे। वहां मनन दोपहिया वाहनों की मरम्मत का काम सीख रहा था। करीब एक माह पहले पिता-पुत्र गांव लौटे थे। इसके बाद प्रीति की शादी तय हुई तो परिवार में खुशियां लौट आई थीं। बेटी की शादी के लिए घर में खरीदारी शुरू हो गई थी। शिवचंद भी कुछ समय परिवार के साथ रहकर शादी की जिम्मेदारी पूरी करना चाहते थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। तीन दिनों के भीतर पत्नी, मां और बेटी को खोने के बाद शिवचंद पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
प्रशासन ने भेजी चिकित्सकों की टीम
परिजनों के अनुसार प्रीति को बुखार के साथ सांस संबंधी समस्याएं थीं। उसदी दादी जोनिहां को भी सांस संबंधी समस्या थी। भाई मनन भी इस समय सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित है। हालत ये है कि अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। एक ही परिवार में तीन दिनों के भीतर तीन मौतों की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ। एसडीएम के निर्देश पर चिकित्सकों की टीम शिवचंद के घर जांच के लिए भेजी गई। टीम ने परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति और मौतों से जुड़े कारणों की जानकारी ली।
अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में पत्नी आशा देवी और बेटी प्रीति की मौत खून की कमी के चलते हुई है, जबकि बुजुर्ग मां जोनिहां की मौत सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं परिवार में डेंगू या किसी अन्य बीमारी का संक्रमण तो नहीं था।
तीन मौतों से पूरे गांव में पसरा मातम
पशुहारी गांव में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की तीन दिन के भीतर मौत से हर कोई स्तब्ध है। ग्रामीणों के मुताबिक शिवचंद का परिवार आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित था और बेटी की शादी को लेकर खुशियां मना रहा था। किसी ने नहीं सोचा था कि जिस घर में जल्द ही शादी के गीत गूंजने वाले हैं, वहां तीन दिन के भीतर तीन अर्थियां उठेंगी। घटना के बाद गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन है। आसपास के लोग भी पीड़ित परिवार के दुख में शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी कम अवधि में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की घटना उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।