एसओ ने परिवार वालों को बहुत समझाया लेकिन परिवजन शव का दफनाने के लिए तैयार नहीं हुए। परिवार वालों का कहना था कि रविवार रात की प्रार्थना करने के बाद भी अगर बच्ची जीवित नहीं होगी तो उसके शव को अगले दिन दफना देंगे।
एसपी ने बताया कि शव को कब्जे में लेने के लिए एसओ को भेजा है। इस मामले ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। बस्ती वालों का दावा था कि इसी गांव की सरिता नाम की किशोरी को डॉक्टर ने मृत करार दे दिया था। लेकिन प्रभी यीशु की प्रार्थना करने पर जीवित हो गई और अपने परिवार वालों के साथ अब भी रह रही है।
बस्ती वालों का कहना था कि हम लोग छह सालों से यीशु की प्रार्थना कर रहे हैं। एसओ ने जौनपुर निवासी धर्मगुरू से मोबाइल पर बात की तो उन्होंने कहा कि मैंने तो उन्हें ऐसा करने को नहीं कहा था, मृत व्यक्ति भला कैसे जीवित हो सकता है।
प्रार्थना करने वालों में गांव के सुरेंद्र वनवासी, मुन्न, महेंद्र, जितेंद्र, राम रतन, सुशीला, प्रमिला, रिंकू, पुष्पा आदि रहे। इस बाबत एसओ का कहना है कि अंधविश्वास फैलाने वालों के साथ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्हें आज तक का मौका दिया जाएगा।