यूपी के आजमगढ़ में फर्जी पासपोर्ट बनाने का गोरखधंधा जोरों पर चल रहा है। हिजबुल मुजाहिद्दीन के कई आतंकियों सहित अन्य के फर्जी पासपोर्ट यहीं से बने मिले। कई मामले उजागर होने के बाद भी न तो फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की कोई ठोस पहल हुई न ही उन कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई ही की गई जिनकी मिलीभगत से यह खेल खेला जा रहा है।
फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामलों पर गौर करें तो हत्या के मामले में कटौली गांव निवासी पांच हजार के इनामी बदमाश माजिद ने वर्ष 2015 में जौनपुर जिले के केराकत कोतवाली क्षेत्र निवासी अपनी बहन को मां और जीजा को पिता बनाकर अपना पासपोर्ट बनवा लिया और विदेश भाग गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय तक से गुहार लगाई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2007 में वाराणसी, गोरखपुर कोर्ट में हुए सिलसिलेवार बम धमाके के मामले में वर्ष 2011 में लखनऊ में गिरफ्तार हूजी के कथित एरिया कमांडर तारिक हकीम का पासपोर्ट भी यहीं से बनाया गया था। जबकि वर्ष 2001 में अयोध्या में हुए बम धमाके के मामले में वर्ष 2010 में लखनऊ के कानपुर रोड पर हुई मुठभेड़ में मारा गया हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी इमरान के पास से मिला पासपोर्ट भी आजमगढ़ से ही बना मिला था।
वर्ष 2002 में शहर के दलालघाट मुहल्ले में स्थित एक लॉज से गिरफ्तार कश्मीरी युवक मुहम्मद युनूस के पास से मिला पासपोर्ट भी यहीं से बनवाया गया था। अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम का भी पासपोर्ट जिले से अलग-अलग नामों से बनाया गया है।
इसी प्रकार देवगांव कोतवाली क्षेत्र के दौना गांव निवासी एक महिला ने भी अलग अलग नामों से दो पासपोर्ट हासिल कर लिया था। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के फकरूद्दीनपुर गांव निवासी अकरूज्जमां ने भी फर्जी ढंग से अलग अलग नामों से दो पासपोर्ट बनवाए थे।