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बिन मजदूर फैक्टरियां सून

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वाराणसी। जिले की छोटी-बड़ी 28 हजार इकाइयों में श्रमिकों की भारी कमी है। करीब 25 प्रतिशत की रफ्तार से कुटीर और लघु उद्योग चलना शुरू हुए हैं। 12272 इकाईयों में काम शुरू हुआ है। जिनमें सिर्फ स्थानीय श्रमिक ही आ रहे हैं। लोडिंग-अनलोडिंग से लेकर पैकेजिंग करने वाले श्रमिक और कामगार बुलाने पर भी नहीं आ रहे हैं।
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लॉकडाउन में घरों को गए गैर जनपद और बिहार, झारखंड के श्रमिकों को वापस लाने के लिए कई उद्यमियों ने वाहन और ट्रेन टिकट का इंतजाम किया लेकिन श्रमिक कोरोना के भय से आने को तैयार नहीं है। वाराणसी सहित आसपास जनपद के श्रमिक ही फिलहाल आ रहे हैं। इंडस्ट्रियल इस्टेट चांदपुर, एग्रो पार्क करखियांव, चिरईगांव आदि स्थानों पर चलने वाली इकाईयों में आधे अधूरे काम हो रहे हैं। अनलॉक-1 में श्रमिकों की कमी से उद्यमी परेशान हैं कि आगे कैसे उद्योग चलेगा। वहीं प्रवासी श्रमिक व कामगार अभी होम क्वारंटीन हैं। उद्यमी और उद्योग अधिकारी भी ऐसे श्रमिकों और कामगारों से संपर्क में है। जिन्हें बुलाकर काम दिया जाए।
छोटी-बड़ी 12272 इकाईयों में 34 हजार श्रमिक व कामगार के कार्य का दावा है। हालांकि अभी 75 प्रतिशत श्रमिकों व कामगारों के आने का इंतजार है।
घर लौटे प्रवासियों में कोरोना का डर
घर आए श्रमिक वापस काम पर नहीं लौटना चाहते हैं। वे घर के आसपास ही काम तलाशने में जुटे हैं। फैक्ट्री मालिक उन्हें वापस बुला रहे हैं। लेकिन घर पहुंचे श्रमिकों में कोरोना को लेकर डर है। यही कारण है कि वे वापस नहीं लौट रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर सिर्फ गुजरने वाले श्रमिक कैंट और मंडुवाडीह स्टेशन से श्रमिक स्पेशल और यात्री ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन ट्रेनों में सिर्फ गुजरने वाले ही श्रमिक है। कैंट या मंडुवाडीह स्टेशन से विभिन्न जनपदों को जा रहे हैं। इसमें वाराणसी के श्रमिक नहीं है।
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अपने घर चले गए श्रमिक अभी काम पर आना नहीं चाहते, साथ ही उनका परिवार भी कोरोना के भयवश नहीं जाने दे रहा है। पूरी तरह बाजार भी नहीं खुले है, जहां बाजार खुल गए है वहां खरीदार भी नहीं है। -राजेश सिंह, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती काशी प्रांत
बेकरी और केक की फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक व कामगार वापस घरों को चले गए। बेकरी और केक बनाने में फरुखाबाद के कामगार ज्यादा अच्छा काम करते हैं, लेकिन अब वो हैं नहीं। स्थानीय श्रमिक से काम लिया जा रहा है, लेकिन काम में तेजी नहीं है।-आनंद सोनकर, बेकरी कारोबारी
ढलाई की फैक्ट्री है। लॉकडाउन में लेबर घरों को चले गए। अब कारखाना खुल गया है, लेकिन श्रमिकों के अभाव में काम नहीं शुरू हो पा रहा है। श्रमिकों को वापस बुलाने को कई बार बात हुई। लेकिन अभी तक किसी ने आने के लिए हामी नहीं भरी है।-राजकुमार रस्तोगी, उद्यमी, चांदपुर इंडस्ट्रियल इस्टेट
जिले में 12272 छोटी बड़ी इकाईयां खुल गई है। श्रमिक कार्य कर रहे हैं। घर गए श्रमिकों को वापस लाने के लिए उद्यमी प्रयासरत है। जल्द ही और श्रमिकों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। -वीरेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग
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