See, how qualified UP Election candidates
शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में भगवान गौतम बुद्ध की तपस्थली विश्व भर के बौद्ध अनुयाइयों के लिए जहां आस्था का केंद्र है, वहीं कबीर के ताने-बाने की खटर-पटर इसी इलाके के घर-घर में सुनाई पड़ती है। यही वजह है कि मुस्लिम बाहुल्य इस विधानसभा सीट पर नौ बार मुस्लिम विधायक चुना गया। बावजूद इसके बुनकरों की समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया।
शुरुआत में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा के अमरनाथ यादव लगातार तीन बार विधायक रहे। राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह और राम प्रकाश गुप्ता की सरकार में यादव शिक्षा राज्यमंत्री रहे। इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी के मुश्ताक अहमद ने सबसे ज्यादा अंतर से जीत हासिल की थी।
भले ही यहां से एक ही पार्टियों के उम्मीदवार जीत कर विधानसभा में पहुंचते रहे पर क्षेत्र के बाशिंदे बुनियादी सुविधाओं की कमी से अब तक जूझ रहे हैं। एसटीपी बना, करोड़ों की लागत से सीवर लाइन बिछी लेकिन एसटीपी से क्षेत्र कनेक्ट नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर घोषणाओं और योजनाओं के मुताबिक परवान नहीं चढ़ पाया है। क्षेत्रीय नागरिकों की चर्चा में बिजली, पानी और सड़क जैसे मुद्दे ही प्रमुखता से शामिल रहते हैं। ऐसे में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में सोचना बेमानी से ज्यादा कुछ नहीं है। फिर भी सपा-कांग्रेस गठबंधन के अलावा भाजपा, बसपा तीनों दलों के प्रत्याशी लुभावने वादे कर इस सीट को हासिल करने के लिए बेकरार हैं।