निशानेबाजी से खुश होकर हिटलर ने भेंट की थी बंदूक
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आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के चालक रहे कैप्टन निजामुद्दीन उर्फ सैफुद्दीन का 117 वर्ष की अवस्था में सोमवार को तड़के चार बजे निधन हो गया। उन्होंने आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर क्षेत्र के ढकवां स्थित अपने पैतृक आवास पर अंमित सांस ली।
उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे जिले और उन्हें जानने वालों में में शोक छा गया। जानकारी होते ही प्रशासनिक अमला उनके आवास पर पहुंच गया और श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
उनके जनाजे में जिले के प्रतिष्ठित लोगों के साथ क्षेत्र के लोगों की भीड़ उमड़ी थी। दोपहर दो बजे गांव के कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक कर दिया गया। नमाजे जनाजा मौलाना अबुल वफा ने पढ़ाई।
निजामुद्दीन सन् 1947 ई0 में वर्मा में छितांग नदी के किनारे पर नेता जी के साथ आखिरी बार रहे और नेता जी के कहने पर वह भूमिगत हो गए। उसके बाद वे छुप छुप कर रहने लगे और किसी प्रकार वे अज्ञातवास का जीवन गुजारते रहे।
सन् 1969 ई0 में अपने गांव ढ़कवा आए। गांव रहकर भी वह अपनी पहचान छिपाए हुए थे।
उनके बारे में सिर्फ परिवार के लोग ही जानते थे। अमर उजाला अखबार ने ही कैप्टन निजामुद्दीन को नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के अंगरक्षक एवं चालक के रूप में ढ़ूंढ निकाला। इसके बाद कैप्टन निजामुद्दीन चर्चा में आए।