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बलिया: हर साल बड़ी तादाद में सुरहाताल आते हैं साइबेरियन पक्षी, अब सैलानी पक्षियों का हो रहा शिकार

Sun, 22 Nov 2020 05:49 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
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सुरहाताल में साइबेरियन पक्षी। - फोटो : अमर उजाला
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पर्यटन करना मानव ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों का भी नैसर्गिक गुण होता है। यह पर्यटन चाहे मनोरंजन, स्वास्थ्यवर्द्धन की दृष्टि से अथवा अपनी पसंद एवं मनोनुकूल वातावरण के क्षेत्रों में किया जाए। यही कारण है कि प्रति वर्ष बलिया जिले के सुरहाताल की मनोरम वादियों में बड़ी तादाद में साइबेरियन पक्षी आते तो हैं, लेकिन जाते वक्त इनकी तादाद काफी कम हो जाती है। कारण है कि इन प्रवासी पक्षियों को शिकारियों ने अपनी भूख शांत करने का माध्यम बना रखा है। यही नहीं जिले में अघोषित तौर इनका बड़े पैमाने पर कारोबार भी किया जा रहा है।

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साइबेरियन पक्षियों के शिकार और अघोषित कारोबार ने न सिर्फ उनकी तादाद को कम किया है, बल्कि सुरहा की मनोरम वादियों का आकर्षण भी कम किया है। हालांकि सुरहाताल को अब इको क्षेत्र (पारिस्थितिकी क्षेत्र) घोषित कर दिया गया है, जिसके तहत सुरहाताल की सीमा से चतुर्दिक एक किलोमीटर के क्षेत्र में किसी भी प्रकार के जीव-जंतु एवं पक्षियों का शिकार अपराध है।


इसके लिए दण्ड का भी प्राविधान है। लेकिन अब तक इसका कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। अगर प्रवासी पक्षियों के शिकार पर रोक लगे तो शायद जिले के लिए वरदान इन सैलानी पक्षियों को बचाया जा सकता है। पर्यावरणविद् एवं अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबे छपरा के पूर्व प्राचार्य डॉ. गणेश पाठक बताते हैं कि जिले के सुरहाताल सहित दहताल एवं अन्य तालों में विदेशी सैलानी पक्षियां वर्षा ऋतु की समाप्ति के पश्चात ठंड शुरू होते ही आने लगते हैं।
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ये सैलानी पक्षी सुरहाताल को न केवल अपना निवास स्थान बनाते हैं, बल्कि अपना भरपूर भरण-पोषण करते हुए प्रजनन क्रिया भी संचालित करते हैं। 15 मार्च के आसपास ये स्वदेश रवाना होने लगते हैं। डा. पाठक कहते है कि ये पक्षी जिस क्षेत्र में भी जाते हैं, वहां के पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी को किसी तरह का नुकसान नहीं बल्कि संतुलन बनाने का काम करते हैं।

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बेजुबानों के दुश्मन बने सम मानव
सुरहाताल की वादियों को मनोरंजक करने के साथ ही पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने वाले इन खूबसूरत बेजुबान सैलानी पक्षियों के सम मानव दुश्मन बन गये हैं। जब ये पक्षी आना शुरू करते हैं तभी से कुछ शरारती तत्व इनका शिकार करना प्रारम्भ कर देते हैं और जब तक रहते हैं, तब तक बेरोक-टोक, चोरी-छुपे या सीनाजोरी से भी विभिन्न तरीकों से इनका शिकार जारी रहता है।

यही नहीं यहां तक कि इन पक्षियों के अंडे तक भी नहीं छोड़े जाते हैं। ये पक्षी इतने समझदार हैं कि इन्हें एहसास हो गया है कि यह क्षेत्र उनके लिए अब सुरक्षित नहीं रह गया है। यही कारण है कि अब ये पहले की तुलना में कम आ रहे हैं और इनकी विविधता में भी कमी आई है।

साइबेरिया और आस्ट्रेलिया से आते हैं पक्षी
सुरहाताल में खासतौर से उच्च अक्षांशों के शीत क्षेत्रों अर्थात् साईबेरियाई क्षेत्रों से पक्षी आते हैं। ये अति सुन्दर, रंग-बिरंगे एवं मनोहारी होते हैं। ये पक्षी विभिन्न तरह से कलरव एवं करतब करते हुए अति प्रिय एवं आकर्षक लगते हैं। इन पक्षियों में लालशर, हंस, राजहंस, बत्तक, रंग-बिरंगे बगुले, तोते, बघेड़ी सहित अनेक प्रकार की पक्षी शामिल होते हैं। ये हजारों- हजारों की संख्या में झुण्ड बनाकर आते हैं। इसके साथ ही साथ अन्य क्षेत्रों से जैसे कुछ आस्ट्रेलियाई पक्षी भी आते हैं। वास्तव में ये पक्षी वातावरण के अनुकूल प्रवास करते हैं। हजारों किलोमीटर की यात्रा करने के बाद भी ये अपना रास्ता नहीं भूलते और न ही अपना पर्यटन स्थल भूलते हैं। ये अपने समूह में अनुशासन से रहते हैं और अनुशासित होकर यात्रा करते हैं।

सैलानी पक्षियों के शिकार की अब तक कोई जानकारी नहीं है। प्रवासी पक्षियों का शिकार करने वालों पर विभाग पैनी नजर रखे हुए है। अगर कोई ऐसा करते पकड़ा जायेगा तो उसके खिलाफ संबंधित कानून के तहत कड़ी कारवाई की जाएगी।
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