बेजुबानों के दुश्मन बने सम मानव
सुरहाताल की वादियों को मनोरंजक करने के साथ ही पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने वाले इन खूबसूरत बेजुबान सैलानी पक्षियों के सम मानव दुश्मन बन गये हैं। जब ये पक्षी आना शुरू करते हैं तभी से कुछ शरारती तत्व इनका शिकार करना प्रारम्भ कर देते हैं और जब तक रहते हैं, तब तक बेरोक-टोक, चोरी-छुपे या सीनाजोरी से भी विभिन्न तरीकों से इनका शिकार जारी रहता है।
यही नहीं यहां तक कि इन पक्षियों के अंडे तक भी नहीं छोड़े जाते हैं। ये पक्षी इतने समझदार हैं कि इन्हें एहसास हो गया है कि यह क्षेत्र उनके लिए अब सुरक्षित नहीं रह गया है। यही कारण है कि अब ये पहले की तुलना में कम आ रहे हैं और इनकी विविधता में भी कमी आई है।
साइबेरिया और आस्ट्रेलिया से आते हैं पक्षी
सुरहाताल में खासतौर से उच्च अक्षांशों के शीत क्षेत्रों अर्थात् साईबेरियाई क्षेत्रों से पक्षी आते हैं। ये अति सुन्दर, रंग-बिरंगे एवं मनोहारी होते हैं। ये पक्षी विभिन्न तरह से कलरव एवं करतब करते हुए अति प्रिय एवं आकर्षक लगते हैं। इन पक्षियों में लालशर, हंस, राजहंस, बत्तक, रंग-बिरंगे बगुले, तोते, बघेड़ी सहित अनेक प्रकार की पक्षी शामिल होते हैं। ये हजारों- हजारों की संख्या में झुण्ड बनाकर आते हैं। इसके साथ ही साथ अन्य क्षेत्रों से जैसे कुछ आस्ट्रेलियाई पक्षी भी आते हैं। वास्तव में ये पक्षी वातावरण के अनुकूल प्रवास करते हैं। हजारों किलोमीटर की यात्रा करने के बाद भी ये अपना रास्ता नहीं भूलते और न ही अपना पर्यटन स्थल भूलते हैं। ये अपने समूह में अनुशासन से रहते हैं और अनुशासित होकर यात्रा करते हैं।
सैलानी पक्षियों के शिकार की अब तक कोई जानकारी नहीं है। प्रवासी पक्षियों का शिकार करने वालों पर विभाग पैनी नजर रखे हुए है। अगर कोई ऐसा करते पकड़ा जायेगा तो उसके खिलाफ संबंधित कानून के तहत कड़ी कारवाई की जाएगी।