वाराणसी। रियल एस्टेट कारोबारी विनायक ग्रुप के खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के स्तर से कार्रवाई की जा रही है। मगर, कैंट थाने में मुकदमा दर्ज होने के दो माह बाद भी वाराणसी विकास प्राधिकरण और कमिश्नरेट की पुलिस कार्रवाई के नाम पर चींटी की चाल से चल रहे हैं। हालत यह है कि विनायक ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले वीडीए के जोनल अधिकारी प्रकाश कुमार से अब तक दो विवेचक लिखित में यह मांग चुके हैं कि आरोपी से संबंधित पूरा विवरण और अपने पास उपलब्ध साक्ष्य दें। मगर, वीडीए के जोनल अधिकारी को फुरसत ही नहीं मिल पा रही है कि वह पुलिस द्वारा मांगी गई जानकारी लिखापढ़ी में उपलब्ध करा सकें।
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आयकर विभाग के छापे के बाद बीते 18 अक्तूबर को कैंट थाने में वीडीए के जोनल अधिकारी प्रकाश कुमार की तहरीर के आधार पर विनायक ग्रुप के अज्ञात कर्मचारीगण के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। वीडीए के अधिकारी का आरोप है कि विनायक निर्माण प्राइवेट लिमिटेड का वरुणा गार्डेन परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र फर्जी है। अधिकारी के अनुसार विनायक ग्रुप ने पूर्णता प्रमाण पत्र छह फरवरी 2012 को वाराणसी विकास प्राधिकरण के संयुक्त सचिव द्वारा जारी दिखाया है। जांच में यह सामने आया कि पूर्णता प्रमाण पत्र से संबंधित कोई पत्रावली वीडीए में नहीं है। विनायक ग्रुप द्वारा वरुणा गार्डेन परियोजना का फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र दिखाकर आयकर अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत कटौतियां प्राप्त की गईं। इससे केंद्र सरकार को भारी राजस्व की क्षति हुई। इस संबंध में कैंट थाने के इंस्पेक्टर (अपराध) प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि मौजूदा समय में मुकदमे की विवेचना कर रहे हैं। उनसे पहले विवेचना एक सब इंस्पेक्टर के पास थी। सब इंस्पेक्टर और उन्होंने वादी को पत्र भेज कर मुकदमे के आरोपियों से संबंधित पूरा विवरण और उपलब्ध साक्ष्य देने के लिए कहा, लेकिन जवाब नहीं मिला।
जोनल अधिकारी अगर जवाब नहीं दे रहे हैं तो पुलिस हमें पत्र भेजे। पुलिस को जो भी जानकारी चाहिए, हमारी ओर से उपलब्ध कराई जाएगी। - पुलकित गर्ग, वीसी, वीडीए