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BHU का 109वां साल : 10 कोर्स से हुई थी शुरुआत, आज 800 से ज्यादा; चांसलर के लिए होते थे चुनाव

Mon, 03 Feb 2025 03:30 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। महामना की बगिया में विभिन्न आयोजन होंगे। इसको लेकर तैयारियां एक दिन पहले ही पूर्ण कर ली गई थीं। सिंह द्वारा से लेकर तमाम विभागों की आकर्षकता देखने लायक रही।
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BHU - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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109 साल पहले स्थापित हुए बीएचयू में चार प्रमुख होते थे। इसमें चांसलर, प्रो-चांसलर, वाइस चांसलर और उसके नीचे प्रो-वाइस चांसलर का पद होता था। 1952 के बाद इसमें से सिर्फ एक वाइस चांसलर पद ही बचा। इन चारों को चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाता था। 

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बीएचयू में सबसे पहले पांच संकाय थे, जिनमें कक्षाएं शुरू हुईं थीं। वर्ष 1916 में इंजीनियरिंग में स्नातक समेत 10 कोर्स के साथ बीएचयू की स्थापना हुई थी। आज 119 साल बाद बीएचयू में 800 से ज्यादा कोर्स की पढ़ाई हो रही है। इसमें आईआईटी के भी पाठ्यक्रम शामिल हैं।

संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बीए, एमए, बीएससी, एमएससी, एलएलबी, एलएलएम, बैचलर ऑफ साइंस (इंजीनियरिंग), डॉक्टर ऑफ लेटर (डी. लिट), डॉक्टर ऑफ साइंस (डी. एससी) और डॉक्टर ऑफ लॉ जैसे कोर्स की पढ़ाई शुरू करा दी थी। 
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इनकी पढ़ाई के लिए पांच संकायों की स्थापना की गई थी। कला संकाय, ओरिएंटल लर्निंग, थियोलॉजी, साइंस-प्योर अप्लाईड, विधि संकाय में प्रवेश लिया गया था। वहीं जल्द ही टेक्नोलॉजी, मेडिसिन-सर्जरी, कृषि और अन्य फैकल्टी में भी कक्षाएं शुरू करने की उम्मीद दी गई थी। 

आज का संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय ही उस समय का थियोलॉजी संकाय था। छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए 50 लाख रुपये का इंडोमेंट फंड भी दिया गया।

चांसलर और वाइस चांसलर की भूमिका में होता था प्रो-चांसलर
चांसलर, प्रो-चांसलर, वाइस चांसलर का पद भारत के गवर्नर जनरल के द्वारा नोटिफाई होकर भारत के गजट में प्रकाशित होता था। इन्हें कोर्ट और सीनेट का सदस्य भी बनाया जाता था। चांसलर को चुनने का अधिकार कोर्ट के पास था। इनका कार्यकाल तीन साल था। 

प्रो-चांसलर का चुनाव कोर्ट में से ही एक सदस्यों में से होता था। इनका कार्यकाल एक साल का होता था। चांसलर और वाइस चांसलर की गैर मौजूदगी में उसी पद पर काम करता था। कुलपति बनाने के लिए भी कोर्ट द्वारा चुनाव होता था। इस पर विजिटर की अनुमति ली जाती थी। प्रो-वाइस चांसलर भी कोर्ट द्वारा चुना जाता था। कोर्ट जब तक चाहे इन्हें इस पर पद बनाए रख सकती थी।
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अक्तूबर 1917 में कोर्ट की पहली बैठक
वर्तमान में बीएचयू के संचालन में एग्जीक्यूटिव काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल की भूमिका होती है। जबकि 1916 में विश्वविद्यालय चलाने के लिए कोर्ट, काउंसिल, सीनेट और सिंडीकेट होते थे। बीएचयू में कोर्ट की पहली बैठक अक्तूबर 1917 में हुई थी। 

कोर्ट बीएचयू की सुप्रीम गर्वनिंग बॉडी और सीनेट एकेडमिक बॉडी थी। कोर्ट सीनेट के कार्यों की समीक्षा और उनको वैधता देता था। कोर्ट की एग्जीक्यूटिव संरचना को काउंसिल कहा जाता था। भारत का गवर्नर जर्नल बीएचयू का लॉर्ड रेक्टर भी कहा जाता था। 

वहीं, लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल को बीएचयू का विजिटर माना जाता था। एक विजिटर को इतना अधिकार था कि वह कभी भी बीएचयू और इसके कॉलेजों की जांच कर सकता था। रेगुलेशन और नियमों का पालन हो रहा है कि इसकी रिपोर्ट बना सकता था।
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