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सूची हो रही तैयार, पूर्वांचल के 50 हजार श्रमिकों को मिलेगा रोजगार

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वाराणसी। लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में दूसरे प्रदेश से घर लौटे कामगारों को काम देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पूर्वांचल के 50 हजार श्रमिकों को रोजगार से जोड़ने की तैयारी है। सहायक श्रम आयुक्त देवव्रत यादव ने बताया कि जिलें में आए 35 हजार प्रवासियों में से 15 हजार की स्किल मैपिंग की जा चुकी है। ये मुख्यत निर्माण श्रमिक हैं तथा इसके अलावा इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, फिटर, सिलाई का काम करने वाले आदि श्रेणी के कामगार हैं।
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उन्होंने बताया कि जल्द ही इनके मोबाइल पर रोजगार संबंधित संदेश पहुंचेगा। प्रवासियों का रजिस्ट्रेशन करते हुए उनकी स्किल मैपिंग कराई जा रही है। प्रवासियों को अब रोजगार के लिए यूपी सरकार उद्योग विभाग ने श्रम साधन पोर्टल की व्यवस्था की है। इस पोर्टल पर कोई भी सरकारी, गैर सरकारी, निजी एजेंसी द्वारा रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। जिला द्वारा संबंधित प्रखंड क्षेत्र के तहत रजिस्टर्ड संबंधित श्रेणी के श्रमिक की उपलब्धता के आधार पर इसे अप्रूव्ड किया जाएगा। साथ ही संबंधित एजेंसी जिला उद्योग केंद्र से संपर्क कर श्रमिकों का विवरण प्राप्त कर उन्हें कार्य दें सकेगें।
पांच हजार हुनरमंद श्रमिकों की सूची सौंपी
उपायुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार ने बताया कि 5000 हुनर मंद श्रमिकों की सूची आईआईए को उपलब्ध कराई गई है। घर लौटे श्रमिकों को स्किल के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार सभी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए कई प्रकार की योजना तैयार की है। श्रमिकों को आस-पास में साधारण तरीके से रोजगार मिलें इसके लिए विभाग ने पोर्टल भी बनाया जहां सभी एजेंसी पोर्टल पर रजिस्टर्ड कर आस पास के श्रमिकों से काम ले पाएंगें।
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एमएसएमई सेक्टर में प्रवासी श्रमिकों के लिए काम
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने मुख्यमंत्री के साथ एमओयू किया है। प्रदेश में तीन लाख, पूर्वांचल में 50 हजार और वाराणसी मंडल में 12 हजार प्रवासी श्रमिकों व अन्य बेरोजगार युवकों को एमएसएमई सेक्टर में रोजगार दिलाने में सहयोग की बात कही गई है। आईआईए के मंडल अध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा है कि प्रशासन की ओर से पांच हजार प्रवासी व अन्य बेरोजगार की सूची मिली है।
प्रवासी श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने की दिशा में काम चल रहा है। श्रम विभाग, उद्योग केन्द्र स्किल मैपिंग के आधार पर सूची तैयार कर रहे हैं। होम क्वारंटीन प्रवासी श्रमिक बाहर जाकर काम नहीं करना चाहते हैं। मुख्य विकास अधिकारी मधुसूदन हुल्गी
संस्थाएं भी सर्वे कर कुशल कामगारों का जुटा रही आंकड़ा
सरकार से उनकी अपेक्षाएं के बारे में भी पूछा जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। दूसरे प्रदेशों से लौटे कामगारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध करवाने की कोशिश जारी है। सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट द्वारा कोविड संकट से प्रभावित कामगार परिचय अभियान के तहत किया जा रहा सर्वेक्षण जारी है। अभी तक 5 जिलों के 20 विकासखंडों से 3000 से अधिक लोगों से आंकड़े जुटाए जा चुके हैं। आशा ट्रस्ट की इस पहल में अन्य संस्थाएं जैसे लोक चेतना समिति, जन विकास समिति, प्रेरणा कला मंच, मनरेगा मजदूर यूनियन, लोक समिति, ग्रामीण विकास एवं प्रशिक्षण संसथान आदि द्वारा भी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में सर्वे किया जा रहा है।
ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने बताया अधिकतम कामगार अपनी योग्यता और क्षमता के यहीं स्थानीय स्तर पर कार्य का अवसर चाहते हैं। उन्हें लगता है कि मनरेगा इसके लिए पर्याप्त नहीं होगा बल्कि छोटे कल कारखानों और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना होनी चाहिए। दूसरे प्रदेशों में एक कुशल कामगार को 10 से 15हजार रुपये तक की मासिक आय होती थी। जो वर्तमान स्थिति में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पाएगी। कृषि के साथ जुड़े हुए सहायक उद्योगों की स्थापना एक बेहतर विकल्प हो सकेगा।
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