केंद्र सरकार ने जुलाई में कॉरिडोर के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। इसका निर्माण एनएचएआई की ओर से हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर कराया जाना है। परियोजना में मुख्य एलिवेटेड मार्ग के अलावा फ्लाईओवर, लूप, रैंप और लिंक रोड भी शामिल हैं।
इससे पहले केंद्र सरकार के राजपत्र में परियोजना के एक हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े 39 गांवों को चिह्नित किया गया था। निर्माण के लिए एनएचएआई की ओर से पैकेजवार निविदा प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। ऐसे में अब सर्वे के बाद विभागीय अनुमतियों और शासन की स्वीकृति पर परियोजना की अगली गति निर्भर करेगी।
परियोजना से ये होंगे फायदे
- शहर के भीतर वाहनों का दबाव घटेगा, खासकर प्रमुख संपर्क मार्गों पर।
- लंबी दूरी का यातायात शहर के भीतरी हिस्सों से अलग करने में मदद मिलेगी।
- वरुणा नदी के दोनों ओर के इलाकों को तेज और वैकल्पिक संपर्क मार्ग मिलेगा।
- प्रमुख मार्गों, रिंग रोड और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
- फ्लाईओवर, रैंप और लिंक रोड के कारण जाम वाले हिस्सों पर यातायात का दबाव बांटा जा सकेगा।