सूबे में बिजली आपूर्ति के घंटों में बढ़ोत्तरी के साथ शुक्रवार को बिजली की मांग पिछले दो सालों में सर्वाधिक रही। शुक्रवार को मांग 19562 मेगावाट तक पहुंच गई। हालात को संभालने के लिए सिस्टम कंट्रोल ने सूबे के कई हिस्सों में आपात कटौती की।
महंगी बिजली खरीद कर हालात संभाले गए। इससे पहले सितंबर 2016 में बिजली की मांग 17183 मेगावाट की रही।
गत 14 अप्रैल को आपूर्ति के घंटों में बढ़ोत्तरी के साथ ही बिजली की मांग में जबरदस्त इजाफा हो गया था।
उसके बाद से ही अधिकतम मांग 17 हजार मेगावाट के इर्द-गिर्द बनी हुई थी। शुक्रवार को तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही बिजली की मांग सूबे में अब तक के सर्वाधिक 19562 मेगावाट तक पहुंच गई। अधिकतम उपलब्धता 17 से 18 हजार मेगावाट के बीच ही रहने के कारण सिस्टम कंट्रोल को जिला मुख्यालय सहित सूबे के कई हिस्सों में आधे से एक घंटे तक आपात कटौती करनी पड़ी।
वहीं महंगी बिजली खरीद कर भी हालात संभालने की कोशिश की गई। मांग बढ़ने के साथ ही राज्य सेक्टर के परियोजनाओं में लंबे समय से चल रही थर्मल बैकिंग को रोकने के साथ ही उत्पादन पर चल रही इकाइयों से पूरी क्षमता से उत्पादन के निर्देश जारी कर दिए गए।
इसके साथ ही अनपरा परियोजना में 18 सौ मेगावाट के करीब चल रहा उत्पादन बढ़कर दो हजार मेगावाट पहुंच गया। ओबरा में भी गुरुवार को ट्रिप हुई सभी इकाइयों को शुक्रवार दोपहर तक उत्पादन पर ले लिया गया। यहां का उत्पादन 35 मेगावाट से बढ़कर 716 मेगावाट पहुंच गया।
पनकी में 130, पारीक्षा में 744, हरदुआगंज में 607 मेगावाट बिजली पैदा की जाती रही। अनपरा जीएम एके सिंह ने बताया कि बिजली की जरूरत को देखते हुए उत्पादन पर चल रही इकाइयों से पूरी क्षमता से उत्पादन पर लिया जा रहा है।
कुछ देर के लिए बंद हुई तीसरी इकाई भी उत्पादन पर आ गई है। बंद चल रही छठवीं इकाई को भी रविवार तक उत्पादन पर ले लिया जाएगा।