किसी कॉलोनी में सामान्य तार जलने पर एक घंटे, तो कही ट्रांसफाॅर्मर फाॅल्ट होने पर दो से तीन घंटे का समय लग रहा है। आदित्यनगर करौंदी में तो बुधवार को एक खंभा गिरने के बाद उसे लगाने में 12 घंटे का समय लग गया। यह स्थिति तब है जब बिजली की बेहतर आपूर्ति के लिए अभियान चलाकर उपकरणों को दुरूस्त किया जा रहा है। इसके बाद भी आए दिन अंडरग्राउंड केबल फाॅल्ट होने के साथ ही तार टूटने से आपूर्ति बाधित हो रही है।
मई में टूटा रिकॉर्ड
30 मई को 851 मेगावाट बिजली खपत हुई। यह पूर्वांचल के जिलों में सर्वाधिक खपत थी। जबकि 2024 में इसी दिन 813 मेगावाट की खपत हुई थी। 17 मई को 820 मेगावाट वहीं 2024 में इस दिन 742 मेगावाट खपत हुई थी। 13 मई को 748 मेगावाट खर्च हुई जो कि 2024 की तुलना में 106 मेगावाट अधिक रही। मई में 20 दिनों तक औसत से 80 से 100 मेगावाट बिजली रोजाना खपत हुई है। जबकि जून में 2 जून को सर्वाधिक 817 मेगावाट खर्च हुआ है वहीं पिछले साल इसी दिन 732 मेगावाट की खपत हुई थी।