शहर में बिजली की खपत बढ़ जाने से अब विभागों में गर्मी की तैयारियां की जा रही हैं। उपभोक्ताओं को दिक्कतें न हों इसलिए ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार नए उपकेंद्र भी बन रहे हैं।
जिले की सड़कों पर दौड़ रहे इलेक्ट्रिक वाहनों से बिजली विभाग की मुसीबत बढ़ने लगी है। ईवी बैटरी की चार्जिंग में रोजाना 10 प्रतिशत पावर की खपत हो रही है। फरवरी के महीने में ही बिजली की खपत रोजाना 300 मेगावॉट तक पहुंच गई है। यानी 30 मेगावॉट बिजली इलेक्ट्रिक वाहनों पर खर्च हो रही है।
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जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 58 हजार से अधिक हो गई है। इनमें 35 हजार ई- रिक्शा, करीब 20 हजार टू व्हीलर और 3 हजार के आसपास चार पहिया वाहन हैं। ई- रिक्शा चालकों ने बताया कि एक बार फुल चार्ज होने में पांच यूनिट बिजली की खपत होती है। कॉमर्शियल बिजली वर्तमान में 10 रुपये प्रति यूनिट है। जिले के कई इलाकों में आपको चार्जिंग स्टेशन मिल जाएंगे।
बोले अधिकारी
शहर में इ वाहन बढ़ने से बिजली की खपत बढ़ी है। गर्मी में लोगों को बिजली की समस्या न हो इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नए उपकेंद्र और ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं। - अनिल कुमार, मुख्य अभियंता, पूर्वांचल विद्युत निगम