विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पार्टी के कमल संदेश बाइक से प्रचार करने पर रोक लगाया है।
पार्टी सूत्रों की मानें तो जो बाइक कार्यकर्ताओं को प्रचार के लिए बांटी गई थी, उसे वापस मंगाया गया है।
नोटबंदी के दौरान बाइक खरीद मामले में विपक्षियों ने काफी सवाल उठाए थे।
यहां तक की काशी क्षेत्र में बाइक बांटने का कार्यक्रम तय करने के बाद अचानक से कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।
बाद में पता चला कि विपक्षियों के सवालिया निशान से बचने के लिए पार्टी ने ऐसा कदम उठाया है।
इस क्षेत्र के 15 जिलों में भी बाइक कार्यकर्ताओं को बांटे गए थे। शुरुआत में तो कार्यकर्ताओं ने प्रचार किया लेकिन जैसे ही सूचना मिली कि अब प्रचार नहीं करना है। इसके बाद कार्यकर्ता भी मायूस हो गए।
उन्हें जो बाइक मिली थी उसे वापस प्रदेश मुख्यालय भेजा जा रहा है। इस बारे में स्थानीय कोई भी पदाधिकारी बोलने से कतरा रहे हैं।
बता दें कि भी प्रदेश नेतृत्व ने हर विधानसभा में चार-चार बाइक कैडर के कार्यकर्ताओं को दी थी।
अधिकतर विधानसभाओं में बाइक पहुंच गई थी और प्रचार भी शुरू हो गया था। इसी बीच विरोधी पार्टियों की शिकायत इस पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी।
नोटबंदी के दौरान प्रदेश में 1650 बाइक खरीदने के मामले में विपक्षियों ने काफी घेरेबंदी की थी। पार्टी किरकिरी से बचने के लिए भी अभी तक इन बाइकों से प्रचार के कार्यक्रम की रूपरेखा नहीं तय कर पाई है।