मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट का भी कायाकल्प
नमामि गंगे परियोजना के तहत मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट का भी कायाकल्प कराया जाएगा। मणिकर्णिका घाट पर 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। बेतरतीब व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा। अंतिम संस्कार के लिए गैस आधारित व्यवस्था को बढ़ाने की तैयारी है। ठीक इसी तरह हरिश्चंद्र घाट पर सात करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सीएसआर के तहत भी धन जुटाने की तैयारी
घाटों के कायाकल्प की योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्रशासन कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) फंड का सहारा लिया जाएगा। दरअसल, काशी में कई बड़ी कंपनियां सीएसआर फंड से विकास कराने का प्रस्ताव देती हैं। प्रशासन अब घाटों के विकास में कंपनियाें का सहयोग लेना चतता है।
आठ नए घाटों के निर्माण की योजना है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के विकास का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इसे जल्द ही अंतिम रूप देकर काम शुरू कराया जाएगा।- कौशल राज शर्मा, मंडलायुक्त
तो 93 घाट हो जाएंगे
काशी में गंगा किनारे 84 घाट थे। नमाे घाट को विकसित करके यह संख्या बढ़ाकर 85 कर दी गई। अब आठ नए और घाटों को विकसित किया जा रहा है। इससे घाटों की संख्या बढ़कर 93 हो जाएगी।
अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का बड़ा जरिया
गंगा घाट अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार को बढ़ाते हैं। इन घाटों से करीब 1700 नावें चलती हैं। रोजाना लाखों पर्यटक व श्रद्धालु नाव की सवारी करते हैं। गंगा आरती देखने के साथ ही अलग-अलग घाटों पर जाते हैं।