काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ईको-स्किल्ड गंगा मित्र तैयार करने की ट्रेनिंग बुधवार को शुरू हुई। केएन उडुप्पा सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने गंगा मित्र की वेबसाइट भी लांच की। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि गंगा पवित्र है, लेकिन हम उसके पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। हमें इसका ख्याल रखना होगा।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्कूलों में प्राथमिक स्तर से लोगों को शिक्षित करना पड़ेगा। सभी नालों और कारखानों से निकले जल को शोधित करना होगा। इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है, वे गंगा में एक फूल और एक बूंद दूध डालकर भी धार्मिक क्रियाएं कर सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के प्रशासनिक निदेशक राजीव किशोर ने बताया कि बीएचयू गंगा बेसिन का पहला विश्वविद्यालय है, जिसे ईको-स्किल्ड गंगा मित्र की ट्रेनिंग के लिए चुना गया। भविष्य में गंगोत्री से गंगासागर तक के पांचों प्रदेशों में ये योजना मूर्त रूप लेगी।
बीएचयू में गंगा नॉलेज केंद्र व गंगा गैलरी बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। पर्यावरणविद प्रो. बीडी त्रिपाठी ने कहा कि गंगा मित्र सरकार और आमजन के बीच ब्रिज होंगे। प्रथम चरण में 200 लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। गंगा मित्र गंगा संरक्षण, स्वच्छता व अन्य कार्यक्रमों में सहयोग करेंगे।