बनारस सहित पूरे उत्तर भारत में शनिवार को दो बार भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए। पहला झटका दोपहर 11:40 बजे महसूस किया गया। इस दौरान दो मिनट से अधिक समय तक धरती के नीचे हलचल रही। इसके ठीक 37 मिनट बाद 12:17 बजे दोबारा झटकों से धरती डोली। इस बार लगभग 40 सेकेंड तक रुक-रुककर हल्के झटके महसूस किए गए। इस दौरान ऐसा लगा मानो समूचा शहर ही पानी पर हिचकोले ले रहा हो। मौसम विशेषज्ञों ने बनारस में भूकंप की तीव्रता का अनुमान लगभग 5.5 लगाया है। शहर में किसी की मौत की सूचना नहीं है हालांकि अलग-अलग इलाकों से तीन दर्जन से अधिक भवनों की दीवारों और छतों में दरार पड़ने की सूचना मिली। हालांकि परिवहन सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। शहर के प्रमुख बाजार में बंदी जैसा नजारा ही दिखा। जो खुले भी थे, वहां खरीदार नदारद थे।
ध्वस्त हुआ मोबाइल नेटवर्क, वाट्सएप रहा कारगर
आधे घंटे के अंतराल पर लगातार दो बार आए भूकंप के झटकों से पूरे शहर में दहशत फैल गई। डर से सहमे लोग अपने घरों और ऑफिसों से बाहर निकल आए। स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। उधर, भूकंप के झटकों से दहशतजदा लोग अपनों का कुशलक्षेम जानने के लिए फोन पर व्यस्त हो गए। कुछ ही मिनटों में फोन का नेटवर्क ध्वस्त हो गया। इस दौरान सोशल मीडिया (फेसबुक और वाट्सएप) पर सूचनाएं लगातार अपडेट हो रही थीं। कई जगहों से ऊंची इमारतों में दरार पड़ने और पेड़ गिरने की सूचनाएं वाट्सएप पर चलती रहीं।
पीएम मोदी ने कलराज से पूछा बनारस का कुशलक्षेम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र को फोन कर बनारस के हालात की जानकारी ली। शनिवार की दोपहर मोदी का जिस वक्त फोन आया, कलराज मिश्र उस वक्त सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। भूकंप के लगातार आ रहे झटकाें की वजह से वे भी पत्रकारों के साथ सर्किट हाउस के कमरे से बाहर निकल आए।
एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन की फॉल्स सीलिंग टूटकर गिरी
बाबतपुर एयरपोर्ट पर भूकंप के झटकों की वजह से नए टर्मिनल बिल्डिंग की कई फॉल्स सीलिंग टूटकर गिर गई। हालांकि इसमें किसी के चोटिल होने की सूचना नहीं है। एयरपोर्ट के निदेशक एसके मल्लिक ने बताया कि भूकंप के बाद एहतियातन काठमांडू (नेपाल) के त्रिभुवन एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है। यहां आने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बाबतपुर एयरपोर्ट डायवर्ट किए जाने की जानकारी दिल्ली मुख्यालय से मिली है। बताया कि एयर इंडिया की काठमांडू उड़ान आज निरस्त रही। शेष उड़ानों के परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है।
जब अस्पताल में दिखी भगदड़ जैसी स्थिति
भूकंप आने के दौरान शहर के अस्पतालों में भगदड़ जैसी स्थिति दिखी। डॉक्टर, कर्मचारी हों या फिर मरीज और उनके तीमारदार, हर कोई कमरे से बाहर भागता नजर आया। कबीरचौरा महिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल हर जगह लोग खौफजदा दिखे। महिला अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल में ही डटे रहे। उधर, सारनाथ स्थित तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय में चल रही संगोष्ठी छोड़कर लोग हॉल से बाहर निकल गए।
स्कूलों में छुट्टी, सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा
शनिवार की दोपहर जिस वक्त भूकंप आया, कई स्कूलों में कक्षाएं चल रही थीं। आननफानन में बच्चों को कमरे से बाहर खुले मैदान में ले आया गया। थोड़ी देर बाद एहतियातन स्कूल में छुट्टी कर दी गई। भूकंप की सूचना मिलते ही अभिभावक बच्चों को लेने विद्यालय पर पहुंच गए। उधर, वरुणापार इलाके में भी भूकंप की वजह से लोग दहशत में दिखे। कलेक्ट्रेट, विकास भवन, शिक्षा विभाग के कार्यालय, बैंक, अस्पताल समेत कई गैर सरकारी कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी डर के मारे सड़क पर आ गए। विकास भवन के कर्मचारी तो शाम चार बजे तक भवन के बाहर ही सहमे खड़े रहे।
भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा रही निरस्त
भूकंप का असर भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा पर भी पड़ा। शनिवार की दोपहर एक बजे काठमांडू से बनारस के लिए चलने वाली परिवहन निगम की एसी बस सेवा को निरस्त कर दिया गया। बनारस रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके तिवारी ने बताया कि वाराणसी के किसी भी यात्री को शनिवार को बस से काठमांडू से नहीं आना था। सवारी न होने एवं रास्ता बाधित होने की वजह से बस सेवा को शनिवार को निरस्त कर दिया गया।
24 घंटे तक महसूस होते रहेंगे झटके : प्रो. एम. बनर्जी
वाराणसी। भूकंप के झटके पूर्वांचल समेत उत्तर भारत में अगले 24 घंटे तक रह-रहकर महसूस होते रहेंगे। बीएचयू के भू-भौतिकी विभाग के प्रो. मानस बनर्जी ने बताया कि धरती के करीब 10-12 किलोमीटर नीचे चट्टानों के टूटने के कारण ही भूकंप आया है। जब तक टूटी हुई चट्टानें दोबारा व्यवस्थित नहीं हो जातीं, तब तक समय-समय पर झटके महसूस होते रहेंगे। हालांकि इसकी तीव्रता लगातार कम होती जाएगी। प्रो. बनर्जी ने कहा कि बनारस और आसपास के इलाके में धरती के नीचे की बनावट बेहद ठोस है। ज्यादातर हिस्सों में मिट्टी है। इसलिए यहां भूकंप के झटके उतने तीव्र महसूस नहीं किए गए हैं। अगर ये चट्टानी इलाका होता तो यहां तबाही का मंजर बेहद खौफनाक होता।