वाराणसी। आधुनिकता की अंधी दौड़ में परमाणु अस्त्रों की भयावहता के प्रति शुक्रवार की शाम धर्मवीर भारती के नाटक ‘अंधायुग’ के मंचन से सचेत किया गया। अस्सी घाट पर इस नाटक को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। यह नाटक दशरूपक सेवा समिति और जिला सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में मंचित किया गया।
17 दिन तक चले महाभारत के भीषण युद्ध के बाद के पश्चाताप से नाटक की शुरुआत होती है। कौरवों की हार, सैनिकों का आर्त्यनाद, गांधारी का शाप, धृतराष्ट्र का मोह, अश्वस्थामा का प्रतिशोध तो उभरता ही है, उन प्रहरियों की पीड़ा भी गूंजती है जो महल के सूने गलियारों की रक्षा करते थे। इस नाट्य की इस दौर में प्रासंगिकता साबित की गई। संदेश दिया गया कि हमें इस अंधी आधुनिकता की दौड़
परमाणु अस्त्रों की भयावहता की ओर धकेल रही है। क्या इस पीड़ा को कोई सुनेगा जो अंधा नहीं है।निर्देशन सुमित श्रीवास्तव ने किया। संगीत परीक्षित शर्मा का था। इससे पहले क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र के प्रमुख डॉ.रत्नेश वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित किया। समाजसेवी किशन कुमार जालान ने अभिनय से प्रभावित होकर कलाकारों को 10 हजार रुपये का पुरस्कार दिया।