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ई-टिकटिंग फर्जीवाड़ाः पांच साल में ही इतनी संपत्ति का मालिक बन गया अनिल, खुलासा होने पर चौंके लोग

Sat, 30 Dec 2017 01:59 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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ई-टिकटिंग और तत्काल टिकट की धांधली में गिरफ्तार जौनपुर के अनिल गुप्ता ने पांच वर्ष में ही इतनी संपत्ति बना ली कि उसने एक प्लाट खरीदने के लिए वाजिब कीमत से अधिक बोली लगा दी।
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सीबीआई के हत्थे चढ़ा अनिल गुप्ता चार भाइयों में सबसे बड़ा है। चारों भाई मुंबई में रहते थे। छोटा भाई बीमारी के चलते पहले से ही घर पर रहने लगा था। अनिल पिछले एक साल से अधिकतर गांव में ही रह रहा था।

बीच-बीच में उसका मुंबई आना-जाना लगा रहता था। टिकट की काली कमाई से अर्जित धन को सफेद करने के लिए वह इन दिनों जमीन खरीदने में जुटा था। करीब एक साल पहले उसने शहर से करीब कचगांव रोड पर एक प्लाट खरीदा था।
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सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाला अनिल करीब आठ माह पहले उस समय चर्चा में आया था जब उसने शहर में हाईवे पर स्थित एक प्लाट खरीदने के लिए दूसरों से तीन लाख अधिक 10 लाख रुपये की बोली लगाई थी। हालांकि उस जमीन को वह नहीं खरीद सका।

उसने गांव से अधिक अचल संपत्ति मुंबई में खरीद रखी है। पिछले 15 दिनों से वह एक जमीन के सौदे में जुटा था। नाथूपुर गांव के कुछ सूत्रों पर भरोसा करें तो पिछले दस दिनों में उसने तीन प्लाटों की रजिस्ट्री कराई है। उसके पास करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ।
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सीबीआई ने जब्त की कई पासबुक

सीबीआई
अनिल गुप्त की निशानदेही पर सीबीआई ने नौपेड़वा बाजार में भी ई-टिकट का काम करने वाले एक व्यक्ति के यहां मंगलवार को छापा मारा था। मौके से लैपटॉप, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क के अलावा सीबीआई को दस से अधिक बैंकों की पासबुक मिली थीं, जो अलग-अलग नामों से थीं। सूत्र बताते हैं कि कारोबारी टिकट का पैसा अलग-अलग खातों में मंगाता था।

दूसरों के नाम से खुले इन खातों की पासबुक उसने अपने पास रख ली थी और एटीएम से खाते का संचालन करता था। रेल टिकट के गोरखधंधे में गिरफ्तार अनिल गुप्ता मुंबई में भी टिकट का ही कारोबार करता था।

मुंबई से ही वह गिरोह के संपर्क में आया था। आईआरसीटी की वेबसाइट को हैंक कर टिकट बुक करने में मददगार अवैध साफ्टवेयर का काला धंधा भी उसने वहीं से शुरू किया था।

तत्काल टिकट को लेकर सबसे अधिक मारामारी पूर्वांचल और बिहार में होती है। इसीलिए उसने इस धंधे को इसी इलाके में फैलाया। वह ई-टिकटिंग के कारोबारियों से संपर्क बनाकर उन्हें साफ्टवेयर बेचता था।
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